यूपी सरकार को उसी के कर्मचारी व अधिकारी लूट रहे : कोर्ट

अदालत ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार इतना व्यापक हो चुका है कि अब सरकार को विभिन्न योजनाओं के मद में किये जाने वाले भुगतान की जांच सावधानीपूर्वक करनी चाहिए। न्यायालय ने कहा कि अब उसके अपने ही कर्मचारी योजनाओं का पैसा हड़प रहे हैं। यदि ऐसा होता रहा तो जनता तक योजना का समुचित लाभ नहीं पहुंच सकेगा। न्यायालय ने यह भी कहा है कि भ्रष्टाचार में लिप्त सरकारी कर्मियों और उनके परिवार वालों की सम्पत्ति जब्त करने और उनसे वसूली किए जाने के लिए कड़ा कानून बनाये जाने की आवश्यकता है।
यह टिप्पणी न्यायालय ने मनरेगा में हुए भ्रष्टाचार की एक शिकायत की सुनवाई के दौरान की। महोबा के ग्राम विकास अधिकारी रामलखन और अन्य की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति राकेश तिवारी और न्यायमूर्ति वीपी पाठक ने कहा कि योजना में भ्रष्टाचार हुआ है। याची महोबा के चरखरी क्षेत्र में ग्राम विकास अधिकारी है। उसने ग्राम पंचायत अधिकारी और अन्य लोगों के साथ मिलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम मनरेगा के तहत राशिदा नामक महिला के नाम पर योजना के खाते से 4340 रुपये का भुगतान करा दिया।
ध्यान देने योग्य बात यह रही कि राशिदा की मृत्यु वर्ष 2001 में हो चुकी थी उस वक्त योजना लागू भी नहीं हुई थी। शंकर लाल नामक व्यक्ति ने उच्च न्यायालय में इसके खिलाफ याचिका दाखिल की थी। याचिका पर न्यायालय ने तीन अगस्त 2010 को जिलाधिकारी महोबा को मामले की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिये थे। मामले की जांश शुरू हुई तो हकीकत सामने आ गयी जिसके बाद ग्राम विकास अधिकारी तथा अन्य लोगों के खिलाफ चरखरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इस पर आरोपियों ने न्यायालय में गिरफ्तारी पर रोक की योचिका दायर की जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया।












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