यूपी के शिक्षा मंत्री के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग, सुनवाई 2 को

न्यायालय में जनहित याचिका दायर होने के बाद यह आशंका जतायी जा रही है कि हो न हो कोर्ट देर सवेरे सीबीआई जांच का आदेश कर देगा। यदि ऐसा होता है तो माया का एक और मंत्री विवाद में फंस जाएगा। मंत्री रंगनाथ मिश्र के खिलाफ यह जनहित याचिका बेहरोजपुर भदोही के पूर्व प्रधान बृजनाथ यादव ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दाखिल की है। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश एसआर आलम और न्यायमूर्ति प्रकाश कृष्ण ने सुनवाई की। याचिका में कहा गया है कि बेहद मामूली परिवार के विधायक रंगनाथ मिश्र ने मंत्री बनने के बाद नाजायज तरीके से करोड़ों रुपये की सम्पत्ति अर्जित कर ली।
न्यायालय के सामने याचिका कर्ता ने कहा है कि उन्होंने इलाहाबाद के टैगोर टाउन में 80 लाख रुपये की लागत का बंगला एक ही दिन में खरीद लिया जबकि अपने चुनाव के समय नामांकन घोषणा पत्र में उन्होंने जो सम्पत्ति का ब्यौरा दिया है वह बेहद मामूली परिवार से हैं। आरोप है कि रंगनाथ मिश्र ने माध्यमिक शिक्षा मंत्री रहते हुए अपने पद का दुरपयोग किया तथा विधायक निधि का पैसा अपने सगे सम्बन्धियों के विद्यालयों को ही दी है। आरोप लगाया गया है कि मुम्बई में भी उनके पास करोड़ों रपये की सम्पत्ति है जबकि उनकी आय का विधायक के अतिरिक्त कोई अन्य ज्ञात स्रोत नहीं है।
मिश्र के ऊपर लगाए गए आरोपों की याचिका पर अगली सुनवाई दो नवम्बर को होगी। रंगनाथ मिश्र पर इससे पूर्व भी भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे लेकिन इस प्रकार न्यायालय तक कोई भी मामला नहीं पहुंचा। अब सरकार के सामने भी अपने मंत्री को बचाने का सवाल खड़ा हो गया है। बसपा सरकार यह विचार कर रही है कि एक ओर चुनाव आने वाला है विपक्षी लगातार चारों ओर से उन पर हमला बोल रहे हैं ऐसे में यह जनहित याचिका आखिर सरकार करे भी तो क्या।












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