अमीर बनने के लालच ने पहुंचा दिया जेल

राजधानी के गुडम्बा के सीमांतनगर निवासी धनीराम शर्मा का बेटा कन्हैया लाल (22) जुलाई में लापता हो गया था। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन कोई खबर नहीं मिली। इसके बाद घरवालों ने कैन्हया की गुमशुदगी के पर्चे(पम्पलेट) जगह-जगह लगवा दिए। फैजाबाद रोड पर चिनहट चौराहे पर लगे पर्चों पर रनवीर व अभिनव की नजर पड़ गयी। यहीं तैयार की गयी फिरौती की योजना।
एक युवक ने 16 सितम्बर को कन्हैया के भाई ओमप्रकाश के मोबाइल पर कन्हैया की जान की सलामती चाहते हो तो पांच लाख रुपये बतौर फिरौती देने होंगे। घर वाले तत्काल राजी हो गए। फोन करने वाले एक बैंक खाता संख्या देकर पैसे जमा करने की बात कही। कई दिनों के बाद सूचना मिलने पर घरवालों को शक हुआ तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। पुलिस ने जब बैंक खाते का पता लगाया कि तो वह कैन्ट निवासी पुष्पेन्द्र के नाम था।
पुलिस पुष्पेन्द्र से पूछताछ की तो पता चला कि फिरौती मांगने वाला व्यक्ति उसका मामा रनवीर है जो गोरखपुर में रहता है। असलियत जानने के लिए पुलिस ने कैन्हया के घरवालों से कहा कि फोनकर्ता से दूसरा बैंक खाता मांगा जाए। फोन करने वाला इस पर भी राजी हो गया इस बार उसने देवरिया के सेन्ट्रल बैक का खाता बताया। पुलिस की एक टीम देवरिया रवाना हुई तो पता चला कि वह खाता मंजू देवी नाम की महिला के नाम पर है। कन्हैया के घर वालों ने फोनकर्ता से पैसे जमा कराने की बात कहकर पैसा निकालने को कहा इस पर वह बैंक पैसा निकालने देवरिया पहुंचा लेकिन वहां पुलिस पहले से मौत थी। पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लिया। रनवीर जो गोरखपुर में रह रहा था जबकि देवरिया निवासी अभिनव के साथ मिलकर पैसा बनाने की फिराक में था।












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