अमेरिका क्यों कर रहा है नरेंद्र मोदी की चापलूसी?

अमेरिकी संसद ने नरेंद्र मोदी को कुशल शासक करार देते हुए उन्हें भारत में विकास का मुख्य वाहक तक करार दे दिया। अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी सांसद ने कहा कि 2014 का लोकसभा का चुनाव बीजेपी के नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के राहुल गांधी के बीच होने जा रहा है। अमेरिका के बदलते सुरों पर नरेंद्र मोदी ने अभी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।
अमेरिका द्वारा नरेंद्र मोदी की चापलूसी के कई कारण हो सकते हैं। अमेरिका को पता लग गया है कि भ्रष्टाचार ने यूपीए सरकार की जड़ें हिला दी हैं। अब ऐसा मुश्किल है कि 2014 के लोकसभा चुनावों में यूपीए फिर से बहुतमत में आए। अमेरिका को आगामी चुनावों में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी बहुमत बनाती हुई नजर आ रही है। जिस वजह से अमेरिका ने अभी से बीजेपी और पार्टी पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं।
अमेरिका को भी पता है कि नरेंद्र मोदी वीजा के जिस मुद्दे को लेकर आगबबूला हैं वह उनके प्रधानमंत्री बनने के साथ खुद ही खत्म हो जाएगा। अमेरिका भी किसी देश के प्रधानमंत्री को वीजा देने से मना नहीं कर सकता है। क्योंकि भारत के प्रधानमंत्री को हर साल यूनएओ में हिस्सा लेने जाना होता है। अमेरिका की वीजा ने देने की हरकत से नरेंद्र मोदी इतना खफा थे कि उन्होंने अपनी सरकार की बुकलेट में इसका जिक्र 46 पन्नों में करवाया था।
अमेरिका नरेंद्र मोदी की विकास नीतियों से इतना ज्यादा प्रभावित है कि वह गुजरात में बढ़-चढ़कर निवेश कर रहा है। अमेरिकी कंपनी राज्य में 22 बिलियन डॉलर का इनवेस्टमेंट कर रही हैं। अमेरिका ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गुजरात ने पिछले साल 11 फीसदी विकास दर हासिल की है जो देश की विकास दर 5 फीसदी से दोगुनी है। देश की निर्यात में भी गुजरात की हिस्सेदारी 22 फीसदी है।
नरेंद्र मोदी अगर अमेरिका के सामने झुक रहा है तो इसकी बड़ी वजह जरूर होगी। उसे पता है कि भारत की मदद के बिना वह एशिया में अपना प्रभुत्व नहीं बना सकता है। एशिया से चीन अमेरिका को कड़ी टक्कर दे रहा है। भारत व्यापार के मामले में भी अमेरिका का बड़ा सहयोगी है। ऐसे में क्या अमेरिका नरेंद्र मोदी की तारीफ में कहीं न कहीं अपना फायादा देख रहा है।












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