प्रशांत भूषण ने नोटिस पर जवाब दिया कम सुनाया ज्यादा

Prashant Bhushan replies to privilege notice
नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल और पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी के बाद प्रशांत भूषण ने भी अब संसद के विशेषाधिकार हनन के नोटिस के जवाब में अपना पक्ष रख दिया है। हालांकि इस जवाब में उन्होंने अपना पक्ष तो कम ही रखा है, लेकिन उन्होंने सांसदों को खूब नसीहत दी है। उन्होंने विशेषाधिकार हनन के नोटिस के जवाब में कहा है कि संसद अपने कामकाज में गंभीर समस्या को दूर करने की बजाय आलोचना करने वालों के मुंह पर ताला लगाना चाहती है। उन्होंने लिखा है, मैंने यह कहा है और कहता रहा हूं कि अगर सांसद समझते हैं कि एक बार चुन लिए जाने के बाद वे अपनी मनमानी करेंगे तो वे लोकतंत्र का गलत मतलब निकाल रहे हैं।

भूषण ने कहा है कि यह बयान सिर्फ उन लोगों के खिलाफ है जो ऐसा करते हैं। नोटिस का जवाब देते हुए उन्होंने फिर याद दिलाया है कि हाल के दिनों में सांसदों और विधायकों का आचरण बहुत मर्यादित नहीं रहा है। सदस्य कई बार एक-दूसरे पर हमला करते हैं। सदन के भीतर माइक और यहां तक कि कई बार कुर्सियां फेंक देते हैं। ऐसे भी उदाहरण हैं जब सांसदों ने संसद में सवाल पूछने के लिए पैसे लिए। सरकार बचाने के लिए पैसे लिए गए यह सदन में बार बार इसका मामला उठा है। स्टिंग आपरेशनों ने भी इसकी पोल खोली है।

ऐसे में यह हर नागरिक का अधिकार है कि वह इस स्थिति का आकलन करे। भूषण के मुताबिक संविधान ने जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है, संसद का विशेषाधिकार भी इस पर रोक नहीं लगा सकता। उन्होंने दावा किया है कि संसद का विशेषाधिकार हनन तब होता है जब सांसद संसदीय कार्यवाही को बाधित करते हैं या फिर जब वे रिश्वत लेते हैं। अगर कोई नागरिक सांसद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करता भी है तो उसके खिलाफ संसद के विशेषाधिकार का हनन नहीं होता।

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