'तौबा ये बिल तो सांप्रदायिक दंगे करा देगा'

मनमोहन सिंह की अध्यक्षता मे आयोजित इस बैठक में सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि यह एक ऐसा खतरनाक कानून साबित होगा, जो देश के संघीय ढांचे को नुकसान पंहुचा सकता है। उल्लेखनीय है कि इस बैठक में भाजपा या राजग शासित राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और पंजाब के मुख्यमंत्रियों ने प्रस्तावित विधेयक के मौजूदा प्रारूप पर कड़ी आपत्ति जताई।
बैठक में शामिल लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने भी इसका विरोध करते हुए कहा कि यह ऐसा खतरनाक कानून साबित होगा, जो सांप्रदायिकता को काबू करने की बजाय उसे हवा देगा। साथ ही यह बहुसंख्यकों और अल्पसंख्यकों में दूरी बढ़ाएगा। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिनेश त्रिवेदी ने भी कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक के वर्तमान प्रारूप का विरोध करती है।
उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि इस विधेयक में कुछ ऐसे आपत्तिजनक प्रावधान हैं जो राज्यों के सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे। इसी क्रम में बिहार के मुख्यमंद्धी नीतीश कुमार ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे ऐसी धारणा पैदा हो सकती है जिससे यह लगेगा कि बहुसंख्यक समुदाय ही सांप्रदायिक दंगों/घटनाओं के लिए हमेशा दोषी होता है और इसके परिणाम स्वरूप बहुसंख्यकों में प्रतिक्रिया उत्पन्न कर अल्पसंख्यकों के विरूद्ध ही जा सकती है। खास बात तो यह थी कि बैठक में नीतीश उपस्थित नहीं थे और उनकी ओर से राज्य के सिंचाई मंत्री विजय चौधरी ने उनका भाषण पढ़ा।
गौरतलब है कि इस विधेयक को सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहाकार परिषद ने बनाया है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साम्प्रदायिक हिंसा विधेयक पर चिंता जताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य निहित हितों की पूर्ति करना है। इससे देश का संघीय ढांचा कमजोर हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के बैठक में पढ़े गए भाषण में कहा गया कि विधेयक पर टिप्पणी करने का यह उचित समय नहीं है और जब समय आयेगा तो जरुर चर्चा होगी।












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