कैश फॉर वोट मामले से डर गये हैं आडवाणी या सियासी चाल चल रहे हैं!
आडवाणी की इस बात से साफ जाहिर होता है कि भाजपा किसी भी कीमत पर कैश फॉर वोट मामले को भूनाना चाहती है। देश के पांच राज्यों में अगले साल चुनाव होने वाले हैं। और भ्रष्टाचार से जनता कितनी दुखी और त्रस्त है इस बात का अंदजा उसे अन्ना आंदोलन से जुड़े लोगों से लग गया है। आडवाणी का एक साथी जिनका नाम सुधीर कुलकर्णी है जो कि कैश फॉर वोट मामले में अभी भी फरार है। कल को अगर वो पुलिस के सामने आता है तो हो सकता है वो ऐसे राज का खुलासा कर सकता है जो भाजपा और आडवाणी दोनों के लिए खतरा है।
इसलिए आडवाणी ने अभी से ही माहौल पैदा कर रहे हैं, जिससे कि अगर कल कुछ भी आडवाणी या भाजपा के खिलाफ होता है तो वो जनता के सामने आसानी से कह पायेगें कि वो पाक साफ है और उन्हें फंसाया जा रहा है। आडवाणी को इससे पहले आम चुनावों में पीएम इन वेटिंग कहकर प्रचारित किया गया था जिसके बाद उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी। आज भाजपा ने ये बात एकदम साफ कर दी है कि कोई भी नेता उनकी पार्टी में पीएम इन वेटिंग नहीं है, ऐसे में आडवाणी का ये बयान पार्टी के इस बात का विरोध करता दिखता है। आडवाणी के पास ये एक आखिरी मौका है जिसे वो भुना सकते हैं।
क्योंकि आम चुनाव अभी नहीं होने वाले हैं इसलिए सत्तासीन पार्टी यूपीए को अभी भी थोड़ा भरोसा बाकी है, कि वो मामले को सुलझा सकते हैं लेकिन भाजपा की पूरी कोशिश ये ही कि भ्रष्टाचार के कारण सुलगी आग को वो जलाये रखे। वो किसी भी कीमत पर इस बार ये मौका खोना नहीं चाहती है। आडवाणी ने कल ये भी ऐलान किया कि वो भ्रष्टाचार के खिलाफ रथ यात्रा भी करने जा रही है। जिसकी शुरूआत वो यूपी से करने वाली है।
ये बात ये साबित करने के लिए काफी है कि अगर वाकई में भाजपा देश के भ्रष्टाचार से परेशान है तो वो रथयात्रा की शुरूआत दिल्ली से कर सकती थी लेकिन वो शुरूआत उत्तर प्रदेश से करने जा रही है जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आडवाणी की पूरी कोशिश कैश फॉर वोट को सियासी रंग देकर उससे होली खेलने की है। अब ये उनका डर बोल रहा है या एक वरिष्ठ राजनीतिज्ञ का दिमाग, ये आने वाला वक्त बतायेगा।
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