सॉफ्टवेयर से अपराधियों की हो सकेगी पहचान

ऐसा संभव होगा एक खास तरह के सॉफ्टवेयर से। फोटो गैलरी ऑफ क्रिमिनल नाम के साफ्टवेयर की मदद से पीडि़त घर बैठे ही अपराधी की पहचान कर लेगा। इस सॉफ्टवेयर को गुडग़ांव पुलिस की साइबर सेल ने संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक मित्तल के निर्देशन में तैयार किया गया है।
आलोक मित्तल का मानना है कि गुनहगारों की पहचान करने में यह प्रकिया अच्छे परिणाम देगी। 60 फीसदी मामलों में देखा जाता है कि वारदात को वही अपराधी अंजाम देते हैं, जो पहले भी उसी तरह के मामलों में जेल जा चुके होते हैं। नए मामलों में भी तैयार किए स्केच को भी फोटो गैलरी ऑफ क्रिमिनल साफ्टवेयर में डाला जाएगा।
फिर उसे पीडि़त के पास ले जाकर दिखाया जाएगा। यहां बता दें कि गुडग़ांव पुलिस पहले ही अपराधियों का डाटा बैंक तैयार कर चुकी है। क्रिमिनल नेटवर्क एनालिसिस सिस्टम भी तैयार किया गया है।
बच्चों व बुजुर्गो को रहेगी आसानी
फोटो गैलरी ऑफ क्रिमिनल साफ्टवेयर की मदद से दूसरे जिलों की पुलिस को भी अपराधियों को पकडऩे में सहायता मिलेगी। इससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गो को आरोपी की पहचान करने के लिए थाने में नहीं आना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट भी पुलिस को पहले ही हिदायत दे चुका है कि उक्त वर्ग के पीडि़त को थाने में न बुलाया जाए।
इस नियम को पुलिस आयुक्त एसएस देसवाल लागू कर चुके हैं। संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक मित्तल ने बताया पुलिस कर्मी लैपटाप पर पुलिस वेबसाइट से अटैच इस विशेष साफ्टवेयर के जरिये अपराधी की पहचान करा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक थाना प्रभारी व विशेष सेल प्रभारियों के पास साफ्टवेयर की आइडी और पासवर्ड समय के मुताबिक इस्तेमाल होगा। वर्तमान में जिस तरह के अपराध सामने आ रहे, उसमें सूचना और तकनीक का इस्तेमाल जरूरी हो गया है।









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