गर्लफ्रेंड को गिफ्ट देने के लिए बन गए लुटेरे

एसएसपी रघुबीर लाल ने बताया कि शास्त्रीनगर निवासी ज्वेलर विकास वर्मा, लुटेरे विक्रम नागर निवासी दादरी और कैलाश जाटव निवासी भोवापुर को पैसिफिक मॉल के सामने से गिरफ्तार किया गया। अमित निवासी बहादुरगढ़, अर्जुन पंडित निवासी अर्थला और नेमपाल निवासी बुलंदशहर अभी फरार हैं।
विक्रम और कैलाश पर सिहानी गेट, साहिबाबाद, लिंक रोड और मुरादनगर में आठ मुकदमे दर्ज हैं। बकौल कप्तान, लुटेरों की तीन-तीन गर्लफ्रेंड हैं, इन्हें महंगे गिफ्ट देने के लिए विक्रम और कैलाश चेन स्नैचिंग करते थे। फिर इन्हें ज्वेलर विकास वर्मा को बेचते थे। विकास की रजापुर में ज्वेलरी शॉप है।
एसएसपी ने बताया कि सिहानी गेट पर मेरठ के व्यापारी सचिन से 10 लाख रुपये भी इसी गिरोह ने लूटे थे, जिसकी मुखबिरी भी विकास ने ही की थी। आईजी ने पुलिस टीम को 15 और एसएसपी ने 5 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है। एसएसपी ने बताया कि विकास वर्मा मेरठ सर्राफा बाजार में आता-जाता रहता है। मेरठ आने जाने वाले ज्वेलर्स के बारे में बदमाशों को सूचना देता था। 12 अगस्त को विकास ने विक्रम, कैलाश और अर्जुन को एएलटी मोड़ पर बुलवाया।
कैलाश की बाइक पर विकास मेरठ गया। अर्जुन और विक्रम बस से मेरठ सर्राफा बाजार पहुंचे। अमित और नेमपाल कार से मेरठ पहुंचे। वहां विकास का साला प्रदीप वर्मा भी आ गया। हरिप्रसाद गोपी कृष्णा ज्वेलर्स का मैनेजर अनूप और जब सर्राफा बाजार में घूम रहे थे तो प्रदीप और विकास भी उनके पीछे ही घूम रहे थे। जैसे ही अनूप सर्राफा बाजार से निकला तो बदमाशी उनके पीछे हो लिए और मुरादनगर में कार का शीशा तोड़कर 5 किलो 100 ग्राम सोने के जेवर, दो लाख 18 हजार रुपये कैश लूट लिए। इसके बाद एएलटी होते हुए कचेड़ा गए और वहां से नीलम विहार जाकर कार में ही जेवर बांटे।
लुटेरों के मोबाइल पर बात नहीं करने से पुलिस का सर्विलांस सिस्टम फेल हो गया था। आपस में बात करने के लिए लुटेरे लैंडलाइन का इस्तेमाल करते थे। पुलिस कार चालक और सुरक्षा गार्ड पर ही शक कर रही थी। सूत्रों की मानें कि एक अनजान फोन कॉल ने वारदात की गुत्थी को सुलझाया। फोन करने वाले ने पुलिस को बताया कि वारदात में ज्वेलर विकास वर्मा का हाथ है। इसके बाद पुलिस ने सुरागकशी कर बदमाशों को पकड़ा। एसएसपी ने बताया कि पुलिस ने मेरठ में ज्वेलरी शॉप के कैमरे भी चेक किए थे, मगर उनमें किसी लुटेरे की फुटेज नहीं थी। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी, मगर सुराग नहीं लगा था। उनका यह भी कहना है कि मुखबिर की सूचना पर ही पुलिस लुटेरों को पकड़ सकी।












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