अनशन को लेकर प्रधानमंत्री ने पल्ला झाड़ा

PM's reply to Anna Hazare's letter
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के तीखे पत्र को पढ़कर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपना जवाब भेजा है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि वह इसके लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाएं, क्योंकि इस मामले से पीएमओ का कोई लेनादेना नहीं हैं। वहीं, कपिल सिब्बल ने भी साफ कर दिया है कि बगैर अंडरटेकिंग दिए अन्ना की टीम को अनशन की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस जवाब से बौखलाई टीम अन्ना के एक सदस्य प्रशांत भूषण ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और दुर्भाग्यपूर्ण बयान करार दिया है।

सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अन्ना की शिकायत से पल्ला झाड़ते हुए जवाब में लिखा है कि अन्ना जी, मुझे आपकी चिट्ठी मिली और मैंने उस चिट्ठी को बेहद गौर से पढ़ा है। आपकी शिकायत है कि पुलिस ने आपको जेपी पार्क में सिर्फ तीन दिन के अनशन की ही इजाजत दी है। इस बारे में स्थानीय अथॉरिटी ही कोई फैसला ले सकती है। मेरा दफ्तर इस तरह के फैसलों में शामिल नहीं होता। स्थानीय एजेंसी आपको किन शर्तों पर अनशन की इजाजत देगी। ये हालात पर निर्भर करता है। इसलिए मैं अन्ना को सलाह दूंगा कि स्थानीय एजेंसियों के पास जाएं। हम सब संविधान के दायरे से जुड़े हुए हैं।

अन्ना की टीम से बात करने वाले केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने दो टूक कहा कि अगर अन्ना के दल के लोग प्रदर्शन को लेकर मांगी गई अंडरटेकिंग नहीं देते तो उन्हें अनशन की इजाज़त नहीं दी जाएगी। वहीं प्रधानमंत्री के पत्र पर टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूषण ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बयान करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले में देश को धोखे में रख रही है।

पीएम ने जो पत्र लिखा है उसे यहां हूबहू प्रकाशित किया जा रहा है....खुद पढ़े.........


I have received your letter, carrying the date 14th August, 2011 and carefully read its contents.

Your grievance that the police has given you permission to protest and go on fast at JP Park only for three days needs to be addressed by the statutory authorities who have taken that decision. My Office does not in any way get involved in the decision making process. The terms and conditions on which you are entitled to carry on with your protest are decided by the statutory authorities concerned taking into account the prevailing circumstances and other relevant factors.


I would request you to address your grievances to the statutory authorities concerned. We are all committed to the Constitution of India and to uphold it both in letter and spirit.

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