नशे का सौदागर और अंडरवर्ल्‍ड डॉन संतोष शेट्टी गिरफ्तार

Fugitive Underworld don Santosh Shetty arrested in Bangkok
दिल्‍ली। अंडरव‌र्ल्ड डॉन संतोष शेट्टी अब मुंबई पुलिस के कब्जे में है। शेट्टी अंडरव‌र्ल्ड सरगना छोटा राजन का सहयोगी रहा है। उसे बैंकाक पुलिस ने गत चार अगस्त को वहां एक बार से गिरफ्तार किया था। शुक्रवार को मुंबई की एक अदालत ने उसे 17 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। बताया जाता है कि शेट्टी बैंकाक के बार में किसी व्यवसायी से मिलने गया था।

जब स्थानीय पुलिस की छापेमारी में उसे संदिग्ध पाया गया तो उसके पासपोर्ट की जांच की गई। जांच में पुलिस को उसके पास से दो पासपोर्ट मिले। उसका एक पासपोर्ट निकोलस शर्मा के नाम से था। जबकि उसके घर की तलाशी लिए जाने पर उसके पास से उसके वास्तविक नाम का भारतीय पासपोर्ट भी मिला। इस पासपोर्ट के आधार पर ही बैंकाक पुलिस ने उसकी जानकारी भारत सरकार को दी। तब उसे मुंबई पुलिस द्वारा भारत लाया गया।

मुंबई पुलिस उससे 1990 से अब तक दर्ज कई मामलों में पूछताछ कर रही है। मुंबई पुलिस के संयुक्त आयुक्त (अपराध शाखा) हिमांशु राय के अनुसार शेट्टी से पूछताछ में पुलिस को उसके खुद के गिरोह के अलावा छोटा राजन सहित कई और गिरोहों की गतिविधियों के बारे में महत्त्‍‌वपूर्ण जानकारियां मिलने की संभावना है। शेट्टी नशीले पदार्थो की तस्करी में भी बड़े पैमाने पर लिप्त था।

फिल्‍मो की तरह ही है शेट्टी की जिंदगी की कहनी

फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले तथा इंटरनेट व कंप्यूटर की नई से नई जानकारी रखने वाले अंडरव‌र्ल्ड डॉन संतोष शेट्टी की जिंदगी बॉलीवुड की किसी फिल्म की कहानी जैसी ही है। दक्षिण मुंबई के डीजी भार्डा स्कूल और फिर हाजी अली के लाला लाजपतराय कॉलेज से पढ़ा 45 वर्षीय संतोष शेट्टी होटल मैनेजमेंट का डिप्लोमा करने के बाद मुंबई के हॉली डे इन होटल में प्रशिक्षु के रूप में काम कर चुका है।

लेकिन उस क्षेत्र में कैरियर बनाने के बजाय संतोष ने 1988 से ही नशीले पदार्थो एवं सोने की तस्करी शुरू कर दी थी। तब वह इन पदार्थो की आपूर्ति मुंबई, सूरत और चेन्नई आदि शहरों में करता था। 1994 में दुबई में उसकी मुलाकात छोटा राजन से उस समय हुई, जब वह दाऊद इब्राहिम से अलग होकर अपना गिरोह मजबूत करने की फिराक में था दुबई में दाऊद का दबदबा था। इसलिए छोटा राजन को दुबई से निकालकर दक्षिण-मध्य एशिया के बैंकाक में बसाने में संतोष शेट्टी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

छोटा राजन के बैंकाक जाने के कुछ ही समय बाद संतोष शेट्टी को नशीले पदार्थो की तस्करी के मामले में मुंबई में गिरफ्तार कर लिया गया। करीब पांच साल नाशिक जेल में रहने के दौरान उसकी मुलाकात भरत नेपाली से हुई, जोकि उस समय डॉ. दत्ता सामंत की हत्या के मामले में जेल काट रहा था। 1999 में सभी आरोपों से मुक्त होने के बाद संतोष शेट्टी ने भी छोटा राजन के साथ बैंकाक में ही अपना ठिकाना बनाया। तब तक छोटा राजन बैंकाक में अपना साम्राज्य फैला चुका था।

17 सितंबर, 2000 को दाऊद के सहयोगी छोटा शकील द्वारा बैंकाक में ही छोटा राजन पर जानलेवा हमला करवाया गया। छोटा राजन को अस्पताल से भगाने एवं सुरक्षित रखने में भी संतोष शेट्टी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तब तक भरत नेपाली भी उसके साथ आ चुका था। लेकिन खुद पर हुए जानलेवा हमले के बाद से छोटा राजन अपने सभी सहयोगियों को शक की निगाह से देखने लगा था। सन् 2004 में कुछ वित्तीय मामलों को लेकर छोटा राजन से उसकी अनबन खुलकर सामने आ गई और उसने छोटा राजन से अलग होने का फैसला कर लिया।

तभी से वह अपना गिरोह मजबूत करने एवं छोटा राजन को कमजोर करने में लग गया। इसी कड़ी में उसने पहले भरत नेपाली के साथ मिलकर मुंबई में छोटा राजन का कामकाज संभाल रहे फरीद तानशा को उसके घर में मरवाया। फिर इसी वर्ष फरवरी माह में भरत नेपाली को भी बैंकाक बुलाकर धोखे से मार दिया। क्योंकि नेपाली से उसे भविष्य में चुनौती मिलने की संभावना थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार शेट्टी मुंबई, गुजरात और राजस्थान से व्यापारियों को वित्तीय मदद दिलवाने का लालच दिखाकर दक्षिण-मध्य एशिया के किसी देश में बुलाता था। फिर उनका अपहरण कर उनसे मोटी फिरौती वसूलता था।

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