हरियाणा के किसान ने कचरे से बना डाली बिजली

हनुमानगढ़ जिला के थालड़का के रायसिंह आज इस गैसीफायर के निर्माता हैं। जोकि खेतों में पानी सींचने से लेकर बिजली पैदा करने के काम आ रहा है। वर्ष 1999 में राय सिंह ने बिना तेल व बिजली के इंजन को चलाने पर अपनी रिसर्च शुरू की तथा इस कार्य में अथक मेहनत के बाद 2001 में सफल हो गया।
सबसे पहले राय सिंह ने पांच केवी का इंजन बिना डीजल के चलाया। इसके परीक्षण के लिए उसने किसानों को इस तरह के इंजन तैयार करके दिए ताकि इंजन सेट में आने वाली दिक्कतों का पता चल सके। समय के साथ-साथ उसमें सुधार होता गया। एक बार सफलता मिलने पर रायसिंह के कदम नहीं रूके और उसने जल्द ही 15 केवी का एक ऐसा गैसीफायर बना दिया है जो कचरे से चलता है।
इस गैसीफायर से जनरेटर चलाकर बिजली भी बनाई जा सकती है तथा खेतों में ट्यूबवेल भी चलाए जा सकते हैं। शनिवार को जाट धर्मशाला में रायसिंह ने अपने गैसीफायर का प्रदर्शन किया। बुलंद हौसले के साथ रायसिंह ने अपने गैसीफायर को भारत के विभिन्न प्रांतों के अलावा दक्षिण अफ्रीका, जर्मनी व कीनिया में भी भेजे हैं।
राय सिंह के अनुसार इस वक्त भी अमेरिका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंकरा, कीनिया, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका आदि से गैसीफायर को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। वह चाहता है कि सरकार यदि इस प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर शुरू करे तो न केवल हम बिजली व डीजल की बचत कर पाएंगे बल्कि गैसीफायर का निर्यात कर देश को आर्थिक लाभ भी पहुंचा सकते हैं। खेतों में पड़ा कचरा करें प्रयोग रायसिंह का गैसीफायर जनेरटर सरसों का तूड़ा, गोबर, पेड़-पौधों के पत्तों, मूंगफली व मक्के के छिलके, चावल व गेहूं का भूसा, नारियल का छिलके आदि से बड़ी आसानी से चल सकता है।












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