जब पाकिस्तान पर होती है बहस

उसके आते भी सब उसी की तरफ लपकते हैं। वहीं पाकिस्तान की बात भी छेड़ते ही सब उस पर कुछ ना कुछ बोलने की लिए बेताब से रहते हैं। कोई न कोई संवाद के वक़्त इतने संवेदशील हो जाते हैं की लगता है अभी जायेंगे घर और एटम बम नहीं तो कोई छोटा मोटा बम तो लाहौर की तरफ फैंक ही देंगे। खैय यह कुछ और नहीं बल्कि देश भक्ति है। जिसका खून देश क लिए भी ना खोला वो खून, खून नहीं पानी है।
भारत और पाकिस्तान, दोनों ही बड़े देश है, पर इन बड़े- बड़े देशों में जो एक आम आदमी रहता है, वोह जज्बातों, संवेदनाओं, भावनाओं से भरा पडा है। दोस्तों, शायद विश्व में यही दो देश होंगे, जहां इंसान तो छोड़ो पेड़-पौधे, पत्थर, कब्रों और यहा तक की जानवरों से भी भावनाएं जोड़ ली जाती हैं। पर जैसा मैंने कहा की दोनों ही बड़े देश हैं और इन्हीं बड़े देशों में कुछ दिल के इतने छोटे लोग भी रहते हैं। मसलन हमारे राजनेता, अलगावादी, आतंकवादी और किन-किन का नाम लें, लिस्ट बड़ी लम्बी है।
वैसे भी कोई महान व्यक्ति कह गया है की नाम में क्या रखा है। तो आइये जारा इनका काम जान लें। अरे भाई यह बिजनेस करते हैं और वो भी कोई छोटा- मोटा नहीं, इन दोनों देशों में रहने वाले करोड़ों आम आदमियों की अरबों भावनाओं का। जी हाँ यह है इनका बिजनेस। जैसा इनका मन करता है, वैसे ही यह दोनों देशों के लोगो की भावनाओं को मोड़ देते हैं। इन्हीं की दया का नतीजा है की आज भी जब भी भारत पाकिस्तान की बात निकलती है, तो भारत में बेठे शर्माजी का दिल करता है की लाहौर पर एटम बम गिरा दें। तोह वही पड़ोसी मुल्क में बेठे खान साहब दिल्ली को नेस्तनाबूद करने का अरमान रखते है।
पर कहीं ना कहीं दोस्तों, जरूरत बात को गहराई में समझने की है की हमारी भावनाएं इतनी भी सस्ती नहीं की कोई जैसे चाहे उन्हें मोड़ दें। अपनी भावनाओं पर हक सिर्फ हमारा है, ना की किसी मौकापरस्त का। तो अगर हम अपनी भावनाओं, अपने विचारों पर जरा सा संजीदा होकर सोचें, तो शायद हमें एहसास हो जाएगा कि दूसरी तरफ खड़े लोग भी इतने बुरे नहीं हैं। आज भी जब पड़ोसी देश से कोई यहां आता है, तो उसके दिल में हमरे लिए प्यार उमड़ता है, या फिर यहां से जाने वाले लोग जब वहां के अनुभव बताते हैं, तो साफ जाहिर होता है कि दोनों देशों की जनता के दिल में कहीं न कहीं प्यार भरा हुआ है।
एक बात और वो है आतंकवाद, जिसके हमलों से दोनों ही काफी घायल हुए हैं। शायद पाकिस्तान ज्यादा चोट खाया है। ऐसे में भले ही वहां के आलाकमान चाहें या नहीं, लेकिन आम जनता जरूर चाहती है, कि वो भी भारतवासियों की तरह खुलकर सांस ले सकें।












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