अब धान के छिलके से बनेगी बिजली

एक मेगावाट क्षमता के परियोजना लगाने पर साढे चार करोड़ रूपये की लागत आती है, जिसमें से 20 लाख रूपये प्रति मेगावाट की सब्सिडी दी जाती है। जिला के पिहोवा उपमंडल के गांव बाखली में मैसर्ज सैंसन पेपर इंडस्ट्री में 3 मेगावाट क्षमता का ऐसा ही प्रोजेक्ट नवंबर 2009 में 16 करोड़ 21 लाख रूपये की लागत से लगाया गया था।
4 अगस्त को सेमिनार का आयोजन
इस नई तकनीक के बारे लोगों को जागरूक करने के लिये विभाग द्वारा 4 अगस्त को होटल सैफरॉन में एक सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उदघाटन भारत सरकार के अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के सलाहकार डॉ. एनपी सिंह करेंगे। परियोजना अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि अधिकतर राईस मिल पुरानी व परंपरागत स्टीम व बॉयलर का उपयोग कर रहे हैं।
इससे प्रदूषण बढऩे के साथ-साथ बिजली की भी भारी मात्रा में खपत होती है। इसी बात का ध्यान रखकर अक्षय ऊर्जा विभाग ने हरियाणा के कुरूक्षेत्र, कैथल, करनाल, जींद, यमुनानगर, अंबाला व पानीपत में 15.5 मेगावाट क्षमता के सात को-जनरेशन प्रोजेक्ट लगाने की योजना बनाई है। इन प्रोजेक्ट के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिये सेमिनार आयोजित किया जा रहा है।












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