नोएडा एक्सटेंशनः कोर्ट के बाहर विवाद सुलझाने का मौका

सूत्रों ने बताया कि ग्रेटर नोएडा के 11 गांवों के लोगों के द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई से पहले कोर्ट ने कहा कि 12 अगस्त तक अथॉरिटी या राज्य सरकार किसानों से सीधे समझौता कर सकती है। हालांकि कोर्ट ने बिल्डरों को मामले में पार्टी बनाए जाने से इन्कार कर दिया है। अथॉरिटी सीधे किसानों के बीच जाकर बात करने की योजना बना रही है। साथ ही किसान भी अब अगली रणनीति तैयार कर रहे हैं। अगर कोर्ट की सलाह से बात आगे बढ़ती है तो घर का सपना देख रहे हजारों लोगों को भी राहत मिल जाएगी।
वरिष्ठ न्यायाधीश ए. लाला की बेंच ने नोएडा एक्सटेंशन की करीब 3 हजार हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण को चुनौती देने वाली किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसान 12 अगस्त तक अदालत से बाहर मामला निपटा सकते हैं, लेकिन इसके लिए किसानों पर दबाव नहीं बनाया जाएगा। समझौते या किसी दूसरे नतीजे की हालत में पूरे मामले का ब्यौरा कोर्ट को देना होगा। यह ब्यौरा अगली सुनाई की तारीख पर दिया जा सकता है।
सूत्रों ने बताया कि ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण संबंधी विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भले ही सुनवाई 17 अगस्त तक के लिए टाल दी हो, लेकिन उसने यह कहकर राज्य सरकार और किसानों के साथ-साथ फ्लैट आवेदकों को भी राहत दी है कि मुआवजे के संदर्भ में 12 अगस्त तक समझौता किया जा सकता है। इस अवसर का लाभ उठाया जाना चाहिए, लेकिन बात तब बनेगी जब राज्य सरकार और किसान वास्तव में बातचीत के जरिये समस्या का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध होंगे। उन्हें इसके लिए प्रतिबद्ध होना ही चाहिए, क्योंकि भूमि अधिग्रहण विवाद के चलते तमाम बिल्डर और साथ ही हजारों फ्लैट आवेदक दोराहे पर आ खड़े हुए हैं।
उधर कोर्ट के इस फैसले से ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और बिल्डरों में उत्साह है। इससे समझौते की राह नजर आने लगी है। अथॉरिटी के सीईओ रमा रमण ने कहा है कि वे सीधे किसानों के बीच जाएंगे। गांव-गांव जाकर किसानों से बात करेंगे और समस्या का समाधान निकालेंगे। कुछ बीच के लोग इसमें रोड़ा बन रहे हैं। उनसे बात नहीं की जाएगी।












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