माया ने मुस्लिम लड़कियों को मदद नहीं रिश्वत दी: विपक्ष

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि गरीबी रेखा से नीचे मदरसों में पढऩे वाली लडकियों को सायकिल और दस हजार से पन्द्रह हजार रूपये देने की जो मुख्यमंत्री ने बात कही है वह आपत्तिजनक है। क्योंकि ऐसी कोई भी योजना लागू करने पर उन्हें केन्द्र सरकार की ओर से राज्य में संचालित कस्तूरबा गांधी स्कूलों को भी शामिल करना चाहिए था। उनका कहना है कि यदि यह योजना मुस्लिम समुदाय की गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली लड़कियों के थी तो भी कस्तूरबा गांधी स्कूलों में मुस्लिम समुदाय की कई गरीब लड़किया शिक्षा प्राप्त करती हैं।
उन्होंने कहा कि केन्द्र की योजना के अनुसार उत्तर प्रदेश में 292 कस्तूरबा गांधी स्कूल खोले जाने हैं। इन स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं को पढऩे के साथ रहने व खाने की भी सुविधा होगी। इन स्कूलों में से 32 स्कूल अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों में खोलने की योजना है। बावजूद इसके राज्य सरकार इन स्कूलों के लिये जमीन देने को तैयार नहीं हो रही है। डा. जोशी का कहना है कि चुनाव से पूर्व इस प्रकार की घोषणा करना मुसलमानों को रिश्वत देने जैसा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जो भी योजना तैयार की उसमें जमकर सरकारी धन की लूट हुई मदरसों में कम्प्यूटर खरीदने से लेकर उर्दू शिक्षकों की भर्ती तक सभी कुछ घोटाले की भेंट चढ़ गया अब सरकार नयी योजना लेकर आयी है। उन्होंने कहा कि हालात यह हैं कि मदरसों में पढऩे वालों को अभी तक छात्रवृति भी नहीं मिलती लेकिन मायावती लड़कियों को आर्थिक मदद देने की बात कर रही हैं।
उधर सपा राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री की मदरसा छात्राओं को आर्थिक मदद दिए जाने की बात उनके साथ सीधे तौर पर धोखाधड़ी करना है। उन्होंने कहाकि सावित्री बाई फूले बालिका शिक्षा मद्द योजना की घोषणा 15 जनवरी 2009 में की गयी थी लेकिन मुख्यमंत्री को मुस्लिम लड़कियों की याद ऐसे वक्त आयी है जब प्रदेश में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं। उनका आरोप है कि बसपा ने मुस्लिम वोट बैंक को अपने पक्ष में करने के लिये ऐसा निर्णय लिया है।












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