वार्ता के बहाने पाक की कश्मीर पर नजर!

2008 में हुए 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद अब दोनों देशों के बीच वार्ता के रास्ते खुले थे। इस हमले में पाकिस्तान का हाथ था जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ किसी भी स्तर की वार्ता करने से इंकार कर दिया था। इसके बाद एक बार फिर भारत ने दोनों देशों के संबंधों में सुधार लाने के लिए वार्ता का सुझाव रखा। इस दौरान मुंबई पर एक और आतंकी हमला भी हुआ। इसके बाद भी भारत ने वार्ता स्थगित न करने का फैसला किया। भारत के इस कदम की तारीफ अमेरिका ने भी की थी।
दोनों देशों के संबंधों को पटरी पर लाने के लिए पाकिस्तान की युवा और पहली महिला विदेश मंत्री 26 जुलाई को दिल्ली पहुंची। उनके कार्यक्रम में भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के अलावा लालकृष्ण आडवाणी के अलावा कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से मिलने का प्रोग्राम था। भारत ने पाकिस्तान की विदेश मंत्री को कश्मीरी अलगाववादियों से मिलने की रजामंदी इस शर्त पर दी थी कि इसमें भारतीय विदेशमंत्री एमएम कृष्णा भी शामिल रहेंगे। इसके अलावा यह मुलाकात विदेश मंत्रियों की मुलाकात के बाद होगी।
पाकिस्तान ने अपने प्रोग्राम में अपने मनमुताबिक फेरबदल कर लिया। विदेश मंत्री हिना रब्बानी ने जम्मू एवं कश्मीर के अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के प्रमुख मीरवाइज उमर फारुख और सैयद अली गिलानी से मंगलवार रात ही मुलाकात कर ली। यहां तक की भारत सरकार को इस मुलाकात की जानकारी भी नहीं थी। अलगाववादी नेता इस मुलाकात के बाद चेहरे पर मुस्कान लिए बाहर निकले। भारतीय सरकार को जब इसकी जानकारी मिली तो उसने इस पर अपना कड़ा ऐतराज जताया।
इस पर अपनी सफाई पेश करने के लिए पाकिस्तान ने अपने विदेश सचिव सलमान बशीर से बयान जारी करने को भी कहा। इस पर सफाई पेश करते हुए सलमान बशर ने कहा कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी का कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकात का मकसद बुरा नहीं था। इस मुलाकात का बुरा असर भारत पाकिस्तान के संबंधों पर नहीं पड़ना चाहिए। दोनों देशों के संबंध सही दिशा में जा रहे हैं।
अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि कैसे अलागववादी नेता भारतीय सरकार की जानकारी के बिना पाकिस्तान की विदेश मंत्री के संपर्क में थे। भारतीय दौरे पर आई पाकिस्तान की विदेश मंत्री ने अलगाववादियों से मुलाकात भी कर ली और सरकार को इसकी जानकारी तक नहीं मिली। इस मुलाकात से जहां पाकिस्तान की सोच व मकसद पर शक होता हैं वहीं भारतीय सरकार की लापरवाही पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।












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