कालका मेल के काल में समाने वाले आठ लोगों की अब तक शिनाख्त नहीं

ऐसे में रेलवे के आला अधिकारियों ने कहा है कि अगर कोई रेलवे के पास कालका मेल में सवार अपने किसी परिजन के लापता होने की शिकायत करता है तो इलाहाबाद एनसीआर कार्यलय आना होगा। इसके बाद रेलवे प्रशासन दावा करने वाले व्यक्ति का डीएनए टेस्ट करवाएगा फिर लखनऊ के फॉरेसिंक लैब में रखे आठ डीएनए नमूनों से उनका मिलान कराएगा। डीएनए नमूने का मिलान होने पर परिजन को उस शव के पास से मिला सामान और उसकी ली गयी फोटो दिखाई जायेगी। अगर सब कुछ मिल जाता है और रेलवे इस बात से संतुष्ट होता है कि यह मृतक का वास्तविक परिजन है तो मृतक का सामान और मुआवजा उसे दे दिया जाएगा।
मालूम हो कि हवाड़ा से दिल्ली आ रही कालका मेल बीते 10 अगस्त को दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी। ट्रेन की 13 बोगियां कानपुर-फतेहुपर रेलमार्ग पर मलवा स्टेशन के पास डिब्बे से उतर गईं थी। यह हादसा कितना दर्दनाक था इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई बोगियां एक के उपर चढ़ गई थी। इस हादसे में 69 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 120 से भी ज्यादा लोगों के गंभीर रूप से घायल हो गये थे। जिन शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी उस संबंध में एनसीआर के महाप्रबंधक ने रविवार को कहा कि कालका मेल दुर्घटना में मारे गये आठ लोगों की पहचान अभी तक नहीं हो पायी है। इनमें से पांच यात्रियों का अंतिम संस्कार इलाहाबाद प्रशासन ने और तीन का अंतिम संस्कार कानपुर प्रशासन ने करवाया है।
रेलवे के आला अधिकारियों ने बताया कि कुछ लोग इलाहाबाद गये थे जिनका ब्लड सेंपल ले लिया गया है और उसके बाद लखनऊ में रखे शवों के डीएनए से मिलाया जायेगा जिसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। फिलवक्त ऐसी स्थित सामने आई है कि एक शव का शिनाख्त करने के लिये आये परिजनों का डीएनए का मिलान नहीं हो सका ।












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