वस्तानवी को महंगी पड़ी मोदी की तारीफ, गंवानी पड़ी वीसी की कुर्सी

, Maulana Ghulam Muhammad Vastanvi
अहमदाबाद। साल 2002 में हुए गुजरात दंगो को मुसलमानों के लिए एक भयनाक ख्वाब की तरह भूलकर आगे बढ़ने की सलाह देने वाले दारूल उलूम देवबंद के कुलपति मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी को आखिरकार कुलपति की कुर्सी गंवानी पड़ी। उन्हें मजलस ए शूरा ने रविवार को उनके पद से बर्खास्त कर दिया। अब उनकी जगह लेगें मौलाना अबुल कासिम नोमानी।

मौलानी नोमनी ने मीडिया को बताया कि रविवार को शूरा ने चार के मुकाबले नौ मतों के अंतर से वस्तावनी को हटाने का फैसला किया। गौरतलब है कि 10 जनवरी 2011 को दारूल उलूम देवबंद को कुलपति बनने वाले वस्तानवी ने कहा था कि हमारे मुल्क के मुसलमानों को साल 2002 के गुजरात दंगों को भूल जाना चाहिए और अपने जीवन की नयी शुरूआत करनी चाहिए।

उन्होने नरेन्द्र मोदी को एक बेहतरीन इंसान और सशक्त नेता बताया था लेकिन उन्होंने मोदी को दंगे मामले में दी गयी क्लीन चिट पर एतराज जताया था। जिसके बाद बवाल ने जन्म ले लिय़ा था। उसके बाद एक कमेटी बैठी थी मामले की जांच करने के लिए जिसने कल वस्तानवी को पद से बर्खास्त कर दिया।

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