यूपी: दो इटैलियन नागरिको को आजीवन करावास की सजा

अभियोजन पक्ष के अनुसार टेराल्बा निवासी फ्रांसिस्को मोंटिस 31 जनवरी 2010 को शाम पांच बजे इटली की ही रहने वाली अपनी महिला मित्र एलिजा विक्टा व टाम्सो ब्रूनो के साथ वाराणसी स्थित एक होटल पहुंचा था। चेन्नई भ्रमण से यहां पहुंचे तीनों साथी होटल के एक ही कमरा नंबर 459 में ठहरे। 4 फरवरी की सुबह लगभग साढ़े आठ बजे फ्रांसिस्को के कमरे से होटल रिशेप्शन पर एलिजा का फोन पहुंचा कि उसके साथी की तबीयत बिगड़ रही है। फ्रांसिस्कों को कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बताया जाता है कि फ्रांसिस्को अपने साथी टोम्सो के साथ लंदन के एक होटल में चलने वाले आर्केस्ट्रा में काम करता था जबकि महिला मित्र एलिजा होटल में रिसेप्शनिस्ट थी। फ्रांसिस्को मोंटिस के शव का दो बार पोस्टमार्टम कराया गया। दोनों ही रिपोर्ट में गला दबाने से उसकी मौत की पुष्टि हुई। इस आधार पर तत्कालीन इंस्पेक्टर चेतगंज धर्मवीर सिंह ने दोनों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें 7 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया।
8 फरवरी को दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया, तभी से दोनों जेल में बंद है। विवेचक ने विवेचना पूरी कर मई 2010 में दोनों के खिलाफ धारा 302/34 भा.द.वि. के तहत अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। अगस्त माह में सुप्रीम कोर्ट ने भी दोनों को जमानत देने से इंकार कर दिया। दौराने विवेचना यह तथ्य प्रकाश में आया कि आशनाई में दोनों अभियुक्तों ने फ्रांसिस्को की हत्या कर दी थी।
अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों अभियुक्तों को दोषी पाया। अभियोजन पक्ष की पैरवी डीजीसी अनिल कुमार सिंह, एडीजीसी इंद्रा शुक्ला व रविशंकर सिंह ने किया। फैसले के समय अभियुक्त ब्रूनो के माता-पिता भी अदालत में मौजूद थे। वे फैसले से पहले अपने पुत्र को ढाढस बंधाते रहे ।












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