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हाई कोर्ट ने सरकार से मांगी सीएमओ हत्या की जांच रिपोर्ट

UP Government ask for CMO murder case probe report
लखनऊ। सीएमओ हत्याकाण्ड उत्तर प्रदेश के गले की फांस बनता जा रहा है। एक ओर डिप्टी सीएमओ डा. वाईएस सचान की हत्या की जांच सीबीआई को सौंपा जा चुका है। बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने दोनों सीएमओ परिवार कल्याण की हत्या व एनआरएचएम घोटाले की रिपोर्ट तलब कर ली। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिए कि विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए।

न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से कहा कि क्यों न दोनों सीएमओ की हत्या की जांच सीबीआई को ंसौंप दी जाए। सीबीआई परिवार कल्याण विभाग के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. वाईएस सचान की जेल में हुई हत्या की जांच कर ही रही है। ऐसे में कोर्ट यह कहना राज्य सरकार के लिए खतरे की घंटी है। सूत्रों की माने तो परिवार कल्याण के सीएमओ डा. विनोद आर्या व डा. बीपी सिंह की हत्या के मामले में कई बड़े नामों पर उंगली उठ रही है और यदि जांच सीबीआई को सौंप दी जाती है तो सरकार की मुश्किलें बढ़ जाएंगे क्योंकि संभावना इस बात की है कि दोनों सीएमओ की हत्या किसी बड़े नाम के इशारे पर हुई है।

न्यायमूर्ति प्रदीपकांत और न्यायमूर्ति रितुराज अवस्थी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि आगामी 22 जुलाई को दोनों मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की हत्या के सम्बंध में जो भी दस्तावेज व केस डायरी दस्तावेज सरकार के पास उसे अदालत में पेश करे। खंडपीठ ने एनआरएचएम में हुए घाटाले की विभागीय जांच रिपोर्ट तलब की है।

ज्ञात हो कि सीएमओ परिवार कल्याण डा. विनोद आर्या की हत्या गत वर्ष 28 अक्टूबर को तथा डा. बीपी सिंह की हत्या गत 2 अप्रैल को उस वक्त हुई थे। दोनों अधिकारियों की हत्या उस वक्त हुई जब वे सुबह की सैर के लिए बाहर निकले थे। वी द पीपुल संस्था द्वारा दायर की गयी जनहित याचिक पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हत्याओं व एनआरएचएम घोटाले की जांच रिपोर्ट मांगी है।

सूत्रों की माने तो सरकार ने पुलिस के माध्यम से जो जांच करायी थी वह अभी तक मुकम्मल नहीं हो पायी है क्योंकि यदि जांच पूरी होती तो कोई न कोई तो दोषी ठहरा ही दिया जाता है। आधी अधूरी जांच के साथ आराम फरमा रही पुलिस के हाथ पांव अब फूल गए हैं क्योंकि जो रिपोर्ट पुलिस के पास है उसके साथ वह कोर्ट में नहीं जा सकते। दो दिनों के भीतर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने के लिए अधिकारियों में खासी परेशानी है। दोनों न्यायधीशों की खंडपीठ इसी मामले में दाखिल एक अन्य जनहित याचिका पर आगामी 25 जुलाई को सुनवाई करेगी।

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