भारत में है सिर्फ एक जल्लाद

Jallad
नई दिल्ली। भारत की आबादी 1.2 अरब पहुंच चुकी है। यहां हर पेशे के लोग हैं यहां तक अपराधी बनने को भी लोग तैयार हैं, लेकिन एक ऐसा पेशा भी है जिसे अपनाने को कोई तैयार नहीं है, वह है जल्लाद का पेशा। असम की जोरहाट जेल में महेंद्रनाथ दास को फांसी दी जानी है, लेकिन असम में कोई जल्लाद नहीं है। असम सरकार ने सभी राज्यों से मदद मांगी है। पता चला है कि पूरे देश में महज एक जल्लाद बचा है, वह है बंगाल का बाबू अहमद।

मेरठ के मशहूर कालू कुमार के खानदान का पवन कुमार भी जल्लाद बनने को तैयार हो गया है। इस तरह जल्लादों की गिनती अब दो हो जाएगी। दोनों को असम सरकार ने महेंद्र नाथ को फांसी देने के लिए बुलाया है। हालांकि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने तकनीकी कारणों से 21 जुलाई तक फांसी लगाने पर रोक लगा दी है।

भारत में आखिरी बार 2004 में रेप और मर्डर के अपराधी धन्नंजय को फांसी दी गई थी। पिछले महीने राष्ट्रपति ने असम के एक अपराधी महेंद्रनाथ दास समेत दो अपराधियों की दया याचिका खारिज कर दी। असम के जेल अधिकारियों ने जल्लाद के लिए पड़ोसी राज्य बंगाल से संपर्क साधा। पता चला कि जल्लाद नाटा मल्लिक की मौत हो चुकी है। सिर्फ बाबू अहमद बचे हैं।

असम सरकार को एक और जल्लाद की जरूरत है। इसके लिए यूपी सरकार से मदद मांगी गई। यूपी के जेल अधिकारी जल्लाद कालू के शहर मेरठ पहुंच गए। कालू कुमार का परिवार इस पेशे से जुड़ा रहा है। कालू के चाचा भी जल्लाद रहे हैं। कालू ने 1989 में इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह और केहर सिंह को फांसी पर लटकाया था। कालू की कुछ साल पहले मौत हो गई। उनके बेटे मामू सिंह ने भी इस पेशे को अपनाया, लेकिन बीती 19 मई को उसकी भी मौत हो गई।

मामू सिंह का सपना था कि वो कसाब और अफजल गुरु को फांसी दे, लेकिन उसका सपना अधूरा रह गया। जेल अधिकारियों ने जब मामू के बेटे पवन से संपर्क किया तो उसने अपने खानदानी पेशे को अपनाने के लिए आवेदन कर दिया। उम्‍मीद है मामू का सपना उनका बेटा पवन जरूर पूरा करेगा।

फिलहाल पवन और बाबू अहमद जल्द ही असम रवाना होंगे। जहां महेंद्रनाथ दास को फांसी दी जानी है। भारत में 500 से भी ज्यादा लोगों को फांसी होनी है। दया याचिका खारिज होने की स्थिति में उन्हें फांसी देनी पड़ेगी। लेकिन जल्लादों की संख्या घटकर दो हो गई है। ज्यादातर जल्लादों ने काम से तौबा कर लिया है। अपने बेटों को इससे दूर कर दिया है। इस हालात में सरकार को मौत की सजा के तरीकों पर जरूर सोचना पड़ेगा। देश की अन्‍य बड़ी खबरें।

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