दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व नेता और आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे नारायण दत्त तिवारी के हलफनामे को दिल्ली हाई कोर्ट ने ठुकरा दिया है और उस हलफनामे पर नाराजगी जाहिर की है जिसमें उन्होंने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी मर्जी के बिना डीएनए टेस्ट के लिए खून का नमूना देने के लिए नहीं कहा जा सकता। अदालत ने इस हलफनामे को यह कहते हुए स्वीकार करने से मना कर दिया कि वह अदालत के पिछले आदेश के अनुसार नहीं है। अदालत ने तिवारी को फटकार लगाई और कहा कि एक सप्ताह के अंदर फिर से हलफनामा दायर करें जो उनका व्यक्तिगत हलफनामा हो न कि उनकी तरफ से उनके वकील का। अगर निर्धारित समय में हलफनामा दायर नहीं किया गया तो अदालत उन पर भारी हर्जाना भी लगा सकती है।
गौरतलब है कि जैविक संतान होने का दावा करने वाले रोहित शेखर के पितृत्व मामले में फंसे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एनडी तिवारी ने दिल्ली हाईकोर्ट के सामने 'व्यक्तिगत हलफनामा" दायर किया है। कांग्रेसी नेता ने अपने हलफनामे में कहा है कि अपनी इस उम्र और इस देश को करीब 70 साल की बेदाग सार्वजनिक छवि पर, मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर विश्वास करता हूं और डीएनए परीक्षण के लिए किसी मजबूरी के खिलाफ सुरक्षित महसूस करता हूं।
तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए डीएनए परीक्षण के लिए खून के नमूने नहीं देने के अपने कदम को सही ठहराया। रोहित ने तिवारी द्वारा अदालत के खून के नमूने देने के आदेश का पालन नहीं करने पर इस कांग्रेसी नेता के खिलाफ अवमानना का मामला चलाने की मांग की है।
Delhi High Court on Thursday warned veteran Congress leader ND Tiwari for his delay in responding to the paternity suit filed by a man claiming to be his biological son.