जेल का जिक्र होते ही बिगड़ जाती है माननीयों की तबियत

Why politicians, officers get ill in the name of jail?
लखनऊ। वातानुकूलित कमरों में नौकरों के बीच रहने वाले माननीयों के सामने यदि जेल जाने की नौबत आती है तो अक्सर उनकी तबियत बिगड़ जाती है। ऐसे तो उन्हें भले ही कोई गंभीर बीमारी न हो और वे चिकित्सालय से परहेज करते हो लेकिन जब जेल का जिक्र होता है वह चिकित्सालय पहुंच जाते हैं फिर चाहे चिकित्सालय जैसा भी हो। मंगलवार को गिरफ्तारी से ऐन पहले जब पूर्व सीएमओ डा. ए.के. शुक्ला की तबियत बिगड़ी को किसी को आश्चर्य नहीं हुआ। डा. शुक्ला कोई पहले वीआईपी नहीं थे जिनकी जेल जाने से पहले तबियत बिगड़ी हो ढेरों माननीय व वीआईपी ऐसे रहे हैं जिनकी जेल जाने से पहले व जेल जाने के बाद तबियत नासाज हो गयी है।

शुरूआत राजधानी लखनऊ के चर्चित हत्याकाण्ड सैफ हैदर नकवी की हत्या के आरोपी इंतिजार आब्दी बॉबी से की जाए तो जेल के नाम से उनके सीने में दर्द होने लगा। बॉबी की तबियत कुछ ऐसी बिगड़ी कि उन्हें बलरामपुर चिकित्सालय के आईसीयू में रखा गया। हालांकि यहां उनके मिलने जुलने वालों का तांता लगा रहा और वे मोबाइल पर अपने करीबियों को दिशा निर्देश देते रहे लेकिन उन्होंने जेल जाना स्वीकार नहीं किया। दूसरा नाम था खाद्य घोटाले में आरोपी एडीएम रहे श्रीपाल वर्मा का जिन्होंने अपनी पत्नी पूर्णिमा वर्मा के रसूख का भरपूर लाभ उठाया। वह जेल जाने से पहले कई दिनों तक चिकित्सालय में अपना इलाज कराते रहे। राजधानी के एक होटल के मालिक भी जेल जाने से पहले बलरामपुर चिकित्सालय में भर्ती रहे और वहीं रहते-रहते उन्होंने अपनी जमानत करा ली।

डिप्टी सीएमओ रहे डा. वाईएस सचान भी जेल जाने से पूर्व दो बार चिकित्सालय में भर्ती हुए और अब पूर्व सीएमओ डा. ए.के. शुक्ला जिन्होंने इस सिलसिले को आगे बढ़ाया। प्रदेश के अन्य जिलों पर नजर दौड़ायी जाए तो नोएडा जमीन घोटाले में की मुख्य आरोपी पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव को भी जेल के नाम पर कई बीमारियों ने घेर लिया था। औरेया के इंजीनियर मनोज गुप्ता हत्याकाण्ड के आरोपी शेखर तिवारी भी चिकित्सलाय में जमे रहना चाहते थे। इसके उन्होंने बलरामपुर चिकित्सालय निदेशक तक से सम्पर्क कर आवेदन किया था कि उन्हें चिकित्सालय में भर्ती कर लिया जाए।

सरकारी धन व जमीन पर कब्जा करने वाले आईएएस अखण्ड प्रताप सिंह या फिर फैजाबाद से विधायक आनन्द सेन ने भी जेल के डर से चिकित्सालय में शरण ली। सिलसिला आज से नहीं बल्कि सपा सरकार में मंत्री रहे अमर मणि त्रिपाठी व उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी के समय से चला आ रहा है। ऐसा भी नहीं है कि बीमार होने पर किसी को जेल में इलाज नहीं मिल सकता है। जेल में चिकित्सालय से लेकर माइनर ओटी तक सभी व्यवस्थाएं मुहैया होती है लेकिन माननीय जेल की बजाय जिला चिकित्सालय या फिर अन्य किसी आधुनिक चिकित्साल में इलाज कराना बेहतर समझते हैं।

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