अब हर गरीब को मिलेगा भर पेट भोजन

गांवों की 75 फीसदी आबादी और शहरी क्षेत्र की पचास फीसदी आबादी को खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में लाया जाएगा। इस पर 95,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि पहले से ही भयंकर राजस्व घाटा झेल रही सरकार के लिए यह बहुत आसान काम नहीं होगा। गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है। लेकिन उन्हें अनाज किस दाम पर दिया जाएगा, इस पर बाद में निर्णय किया जाएगा। एपीएल परिवारों को अनाजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आधार पर राशन उपलब्ध कराने पर सरकार विचार कर सकती है। बिल को मानसून सत्र में पेश करने का है।
इससे पहले सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) ने सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में 90 फीसदी और शहरी क्षेत्रों की 50 फीसदी आबादी को खाद्य सुरक्षा कानून के तहत लाने की सिफारिश की थी। इन्हें कानून के दायरे में लाने के लिए दो श्रेणियां बनाई गई थीं। पहली श्रेणी को प्राथमिक और दूसरी को सामान्य श्रेणी के तहत बांटा गया था।
प्राथमिक श्रेणी के तहत उन परिवारों को इस दायरे में लाया गया है जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। इन परिवारों को एनएसी ने सात किलो प्रति व्यक्ति की दर से खाद्यान्न मुहैया कराने की सिफारिश की थी। इसी तरीके से सामान्य श्रेणी के परिवारों को प्रति व्यक्ति चार किलो की दर से खाद्यान्न उत्पन्न कराने का सुझाव दिया था। सरकार ने प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून में एनएसी की कई सिफारिशों को मान लिया है। अगर यह लागू हो गया तो देश में कम से कम हरेक व्यक्ति का पेट तो भर जाएगा।












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