दयानिधि मारन भी चढ़े 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की भेंट

Dayanidhi Maran resigns from Union cabinet
दिल्ली। अंततः 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले ने पूर्व संचार मंत्री ए. राजा के बाद द्रमुक के एक और मंत्री दयानिधि मारन की भी बलि ले ली है। खबर आ रही है कि आज केंद्रीय मंत्रिमंडल के बैठक के बाद कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन ने भी प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि उन्होंने अभी मीडिया से बात नहीं की है। पर बताया जा रहा है कि थोड़े देर बाद ही वह चेन्नई के लिए रवाना हो जाएंगे, जहां वे पार्टी सुप्रीमो एम करुणानिधि से बात करेंगे।

कयास लगाया जा रहा है कि जब वे चेन्नई के लिए रवाना होंगे तभी संभव है कि वे मीडिया से रूबरू हों। उधर, मुंबई शेयर बाजार में भी इस इस्तीफे की खलबली देखी गई। दयानिधि मारन के परिवार की कंपनी सन टीवी के शेयर में भारी गिरावट दर्ज हुई है। अभी तक वह छह फीसदी गिरावट के साथ मार्केट में बनी हुई है। संभव है कि मार्केट बंद होने तक इसमें कुछ और गिरावट दर्ज हो।

गौरतलब है कि केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन के बारे में दैट्स हिंदी ने पहले ही घोषित कर दिया था कि मारन केंद्रीय कैबिनेट में कुछ दिनों के ही मेहमान है। क्योंकि जिस प्रकार से बुधवार को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट मे अपनी बातें रखीं उससे तो साफ हो गया है कि दयानिधि मारन को जल्द ही कैबिनेट से विदा हो जाएंगे। दयानिधि मारन पर एयरसेल को बेचने के लिए मजबूर करने का आरोप है। इसी सिलसिले में सीबीआई सीबीआई शिकंजा कसने की तैयारी में है। सीबीआई के सामने मारन की भूमिका के बारे में पूर्व संचार सचिव नृपेंद्र मिश्रा के खुलासे से उनपर इस्तीफे का दबाव बढ़ा।

सीबीआई ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में साफ कर दिया कि इस मामले में मारन की भूमिका की जांच की जा रही है और जल्द ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है। एक अन्य घटनाक्रम में प्रधानमंत्री आवास पर सोनिया गांधी, प्रणव मुखर्जी, चिदंबरम, एके एंटनी और अहमद पटेल की मौजूदगी में मारन के मामले पर भी चर्चा हुई थी। जिसमें सभी का मत था कि मारन को इस्तीफा दे देना चाहिए। आज जब मारन कैबिनेट की बैठक मे भाग लेने के लिए पहुंचे तो इन मसले पर कई मंत्रियों से राय मशविरा किए। सूत्र बता रहे हैं कि सभी का मानना था कि सरकार की सेहत के लिए मारन को इस्तीफा दे देना चाहिए।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 2001 से 2007 के बीच स्पेक्ट्रम आवंटन में हुई गड़बडि़यों की प्रारंभिक जांच शुरू की थी। इसके चलते 2004 से 2007 के बीच संचार मंत्री दयानिधि मारन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई। पिछले महीने एयरसेल के पुराने मालिक एस. शिवाशंकरन ने सीबीआई को दिए बयान में आरोप लगाया था कि मारन ने उन्हें कंपनी बेचने के लिए मजबूर किया था। मारन के समय दूरसंचार विभाग के तीन बड़े अधिकारियों ने सीबीआई की पूछताछ में शिवाशंकरन के आरोपों की पुष्टि की। इनमें तत्कालीन संचार सचिव नृपेंद्र मिश्रा,वरिष्ठ उप महानिदेशक पीके मित्तल और संयुक्त सलाहकार (वायरलेस) आरजेएस कुशवाहा शामिल हैं।

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