पीएम को लोकपाल दायरे में लाने को तैयार मनमोहन सिंह

हालांकि इसे सियासी चाल बताया जा रहा है पर मनमोहन सिंह के इस राजफाश के बाद कांग्रेस और समर्थक दलों पर इस बात के लिए दबाव जरूर बनेगा कि वे इस मुद्दे पर एक बार फिर पुनर्विचार करें। बैठक में शामिल हुए नई दुनिया अखबार के प्रधान संपादक आलोक मेहता ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत तौर पर पीएम के पद को लोकपाल के दायरे में लाने के पक्षधर हैं पर उन्होंने कहा कि कुछ पार्टियां और हमारे कैबिनेट के साथियों का इस पर अलग अलग मत है, हमलोग इस पर सहमति बनाने का प्रयास करेंगे और जैसे ही इस पर हमारी सहमति बन जाती है वैसे ही इसे हमलोग संसद में पेश कर देंगे।
मैं व्यक्तिगत तौर पर चाहता हूं कि लोकपाल बिल पास हो। आलोक मेहता ने बताया कि प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने महंगाई, भ्रष्टाचार और कालेधन के मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखी और उन्होंने कहा कि लोकपाल और कालेधन के मुद्दे पर सरकार ने ही बातचीत की शुरुआत की थी। सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर भी हमला बोला। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें कई राजनीतिक दलों से सहयोग नहीं मिल रहा है जिसके कारण उन्हें भ्रष्टाचार, कालेधन और लोकपाल आदि मुद्दे पर लड़ाई लड़ने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने बीजेपी का नाम लेते हुए कहा कि बीजेपी संसद में सरकार का सहयोग नहीं दे रही है।
उन्होंने विपक्षी दलों औऱ खासकर अन्ना हजारे द्वारा रिमोट कंट्रोल की बात कहे जाने पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का उन्हें पूरा समर्थन है और वे किसी प्रकार से किसी के दबाव में नहीं हैं। उन्होंने राहुल गांधी को पीएम बनाए जाने के मुद्दे पर भी अपनी राय जाहिर की।












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