सीएमओ हत्याकांड: कई राज खोल सकते हैं पूर्व सीएमओ

ज्ञात हो कि डा. शुक्ला उस वक्त सीएमओ चिकित्सा एवं स्वास्थ्य थे जब सीएमओ परिवार कल्याण डा. बीपी सिंह की गोली मारकर हत्या की गयी थी। डा. शुक्ला के खिलाफ भी उप मुख्य चिकित्साधिकारी रहे डा. वाई एस सचान के ही तरह वजीरगंज कोतवाली में पिछली सात अप्रैल को भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 419, 420, 467 और 471 के तहत मामला दर्ज कराया गया था। ऊंची पहुंच रखने वाले डा. शुक्ला का पुलिस कुछ नहीं बिगाड़ पायी और अधिक लोगों के प्रश्नों का दबाव उन पर बढ़ा तो उन्होंने तबदला ले दिया।
पुलिस का कहना है कि डा. शुक्ला पर लगे आरोपों की विवेचना चल रही है विवेचना इतनी लम्बी होने के बावजूद अभी तक एक बार भी डा. शुक्ला ने पुलिस स्टेशन की चौखट नहीं चढ़ी। सूत्र बताते हैं कि डा. शुक्ला इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी ही नहीं बल्कि कई मामलों के राजदार भी हैं, लेकिन पुलिस उनसे कुछ पूछ नहीं पा रही है। यदि पुलिस डा. शुक्ला से पूछतांछ कर पाए तो शायद इस पूरे प्रकरण के कुछ और पन्ने खुल सकें।
डा. शुक्ला के मामले में राज्य के विशेष पुलिस महानिदेशक का बृजलाल का कहना है कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना में करोडों रुपये के घोटाले में दोषी पाये जाने पर लखनऊ के पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी डा. ए.के.शुक्ला को अवश्य गिरफ्तार किया जाएगा भले ही वह कितनी भी ऊंची पहुंच क्यों न रखते हों। उन्होंने कहा कि डा. शुक्ला के खिलाफ दर्ज मुकदमें की जांच चल रही है।
उनका कहना है कि बजट में हेराफेरी के ही एक अन्य आरोपी रहे उपमुख्य चिकित्साधिकारी डा. वाई. एस. सचान की गिरफ्तारी दो-दो मुख्य चिकित्साधिकारियों की हत्याकांड में नाम आने पर हुई थी न कि एनआरएचएम में अनियमितता के कारण। बावजूद इसके आज जब डा. बीपी सिंह व डा. सचान दोनों की ही मौत हो चुकी है तो डा. शुक्ला ही बचने हैं जो इस मामले में कुछ प्रकाश डाल सकते हैं लेकिन पुलिस उन्हें जांच व पूछतांछ के दायरे में लाने से कतरा रही हैं। गौरतलब है कि डा. शुक्ला शासन सत्ता में उच्च पद पर आसीन व मुख्यमंत्री के करीबी राजनेता के रिश्तेदार बताए जात हैं जिस कारण कोई उनसे पूछतांछ नहीं कर पा रहा है।
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