मेरे आंदोलन को सरकार ने बर्बरता से कुचला: बाबा रामदेव

रामदेव आज सड़क के रास्ते हरिद्वार से राजधानी पहुंचे और राजबाला का हालचाल पूछने सीधे जी.बी. पंत अस्पताल पहुंचे। राजबाला पांच जून को तड़के रामलीला मैदान में हुई कार्रवाई में गंभीर तौर पर घायल हो गई थी।
रामदेव के जी.बी. अस्पताल आने के चलते दिल्ली पुलिस ने अस्पताल के बाहर और परिसर के अंदर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। रामदेव के समर्थकों को अस्पताल परिसर में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी गई। योगगुरू कुछ करीबी सहयोगियों के साथ ही अस्पताल की दूसरी मंजिल पर भर्ती राजबाला से मुलाकात करने गए। इस दौरान मीडिया को भी अस्पताल में प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई।
राजबाला से मिलने के बाद बाबा रामदेव ने प्रेस को संबोधित किया औऱ सरकार पर जमकर हमला बोला। बाबा ने कहा कि उनके आंदोलन को बर्बरता से कुचला गया। रालबाला की हालत के बारे में उन्होंने बताया कि उसके हाथो और पैरों में कोई मूवमेंट नहीं है। पीठ, पैर पर डंडों के चोट के निशान हैं। पुलिस ने डंडा नहीं मारा तो राजबाला के पीठ, पैर और कमर पर डंडे का बार किसने किया।
बाबा रामदेव ने कहा कि पहले तो सरकार भ्रष्टाचारी थी, लेकिन अब अत्याचारी हो गई है। काले धन और भ्रष्टाचार की बात नहीं होती है। व्यवस्था परिवर्तन की बात की जाती है तो परिवर्तन की मांग करने वालो को दबाने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने कहा कि गांव, गरीब और भारत के विकास की बात जो करता है तो जो इसके विरोधी हैं वो रामदेव को जिंदा नहीं देखना चाहते हैं। अगर भ्रष्टाचार और काले धन का मुद्दा उठाना गलत है तो ये गुनाह लाख बार करेंगे। बाबा ने आरोप लगाते हुए कहा कि 4 जून की रात को महिलाओं के साथ बलात्कार की कोशिश की गई। महिला अधिकारों और मानवीय अधिकारों का हनन किया गया।
उन्होंने कहा कि 4 जून को जब मैं गिरफ्तारी देने को पहुंचा तो पुलिस ने मुझे क्यों नहीं गिरफ्तार किया। रामदेव ने कहा कि पुलिस उनको मिटाना चाहती थी।इसलिए मुझे गिरफ्तार नहीं किया गया। बंद पंडालों में आंसू गैस के गोले छोड़े गए। बाबा ने कहा कि मुझे आतंकवादी हमले का ईमेल भेजा गया। एक लाख किलोमीटर की यात्रा में मुझपर कोई आतंकी हमला नहीं हुआ। रामलीला मैदान में कौन सा आतंकवादी हमला होने वाला था।
बाबा ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या ये देश एक पार्टी के लोगों के रहने के लिए है। क्या दिल्ली एक पार्टी के लोगों को रहने के लिए है। दूसरे लोग यहां नहीं रह सकते हैं। ये कैसा लोकतंत्र है। मुझे पार्टी का मुखौटा कहा जाता है। मैं किसी पार्टी का मुखौटा नहीं हूं। सरकार को उन पार्टियों से दिक्कत है तो उन्हें बैन क्यों नहीं करती है सरकार।












Click it and Unblock the Notifications