प्लास्टिक सर्जरी करवाकर सीआईए एजेंट ने बदला हुलिया

आईडी नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट सबकुछ नए नाम से बनवा लिया है। सीआईए का एजेंट रविंदर को अब पकड़ना मुश्किल माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अगर रविंदर पकड़ा भी गया तो उसकी पहचान मुश्किल होगी। अब उसे तभी पहचाना जा सकता है जब उसके डीएनए का मिलान कराया जाए। रविंदर ने अमेरिका के किसी शहर में अपना ठिकाना बना रखा है और उसका परिवार भी वहीं रहता है।
2004 में रॉ के काउंटर इंटेलिजेंस विंग को रविंदर सिंह पर एजेंसी के संवेदनशील कागजात और जानकारियां लीक करने का शक हुआ। उस वक्त रविंदर दक्षिण-पूर्वी एशिया विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात था। एजेंसी का शक सही निकला और रविंदर के घर और दफ्तर से कुछ ऐसे कागजात मिले जो उसके पास नहीं होने चाहिए थे। इसके बाद गुप्त तरीके से रविंदर पर नजर रखी
जाने लगी।
रॉ के तत्कालीन सचिव सीडी सहाय इस मामले को प्रधानमंत्री स्तर पर ले गए। उस वक्त प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार एमके नारायणन, सुरक्षा सलाहकार जेएन दीक्षित और प्रमुख सचिव टीके नायर ने फैसला किया कि पहले रविंदर की करतूतों से होने वाले नुकसान का जायजा लिया जाए।
सरकार को यह अंदाजा हो गया था कि रविंदर अमेरिकी खुफिया एजेंसी के लिए काम कर रहा है। लेकिन इससे पहले कि रविंदर को गिरफ्तार किया जाता, 14 मई 2004 को वह नेपाल के रास्ते अमेरिका भाग गया। रॉ को हैरानी तब हुई जब पता चला कि रविंदर अपने अधिकारिक पासपोर्ट से नहीं, बल्कि असली अमेरिकी पासपोर्ट के जरिए नेपाल से भागा।












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