विनायक सेन के सहयोगी पीयुष गुहा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

कोर्ट ने उन्हें दो लाख रुपये की जमानत और एक एक लाख रुपये के दो मुचलके भरने का आदेश दिया। कोलकाता के उद्योगपति गुहा को सेन तथा नक्सली विचारधारा के समर्थक नारायण सान्याल के साथ देश के खिलाफ युद्ध के लिए एक नेटवर्क स्थापित करने की खातिर नक्सलियों के साथ सांठगांठ करने का दोषी ठहराया गया था। इन लोगों को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
निचली अदालत के फैसले को गुहा ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जिसने उन्हें इस मामले में जमानत देने से इंकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 24 मई को राज्य सरकार को एक नोटिस जारी कर उसे 31 मई तक जवाब दाखिल करने को कहा था। गुहा की ओर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत से उन्हें जमानत देने की अपील की और कहा था कि वह पहले ही चार साल जेल में बिता चुके हैं।
प्रशांत भूषण ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सेन को जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सेन को राजद्रोह के जुर्म दोषी ठहराए जाने और उम्रकैद की सजा सुनाए जाने पर सवाल उठाते हुए 15 अप्रैल को उन्हें जमानत दे दी थी।












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