अंदरूनी कलह खा सकती है कांग्रेस को

वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि श्रीमती गांधी में नेतृत्व की जो क्षमता थी वह किसी और में देखने को नहीं मिलती। इसी का परिणाम था कि 1977 में चुनाव हारने के बाद पाटी ने वर्ष 1980 में वापसी की।
ज्ञात हो कि पुस्तक में इन्दिरा गांधी पर की गयी टिप्पणी में कहा कि गया प्रदेश में कांग्रेस की लुटिया डूबी थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि जातिवादी और सा प्रदायिक ताकतों के उभरने से राज्य में पार्टी की स्थिति कुछ कमजोर हुई। उन्होंने कहा कि किताब में श्रीमती गांधी के बारे में जो लिखा गया है वह पूरी तरह से भ्रामक और गलत है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य राजेश पति त्रिपाठी का कहना है कि इस बात को बात को स्वीकार नहीं किया जा सकता है कि इंदिरा युग में पार्टी कमजोर हुई।
राज्य में पार्टी की वास्तविक कमजोरी 90 के दशक में हुई जब नेतृत्व की गलत नीतियों के कारण पर परागत कांग्रेस जनों की उपेक्षा की जाने लगी। श्री त्रिपाठी ने कहा कि श्रीमती गांधी कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं के बीच हुए आपसी कलह के कारण पार्टी दो बार टूटी जिसका खामियाजा सभी को उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि एक दशक में दो बार टूटने पर कोई भी पार्टी बिखर सकती है।
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ नेता रामनरेश यादव का कहना है कि आपातकाल के कारण कांग्रेस की लोकप्रियता में जरूर कमी आयी थी लेकिन 1980 में जिस तरह श्रीमती गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने वापसी की उससे साबित होता है कि उनमें नेतृत्व की क्या क्षमता थी। उन्होंनें कहा कि श्रीमती गांधी ने की गयी गलती को सुधारा था। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता स्वरूप कुमारी ब शी का कहना है कि राज्य में पार्टी की हालत तब खराब हुई जब मतदाता जाति के आधार पर बंट गये।












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