दिल्ली में कौन खेल रहा है दशहत का खेल?

दक्षिणी दिल्ली में पूर्व में हुए देसी बम धमाकों की यादें भी लोगों के जहन में कौंध गई। पुलिस महकमा बेशक घटना को हल्का साबित करने पर तुला हो, लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं है कि राजधानी में दहशत फैला रहे तत्व आखिर हैं कौन? आखिर कौन है जो दिल्ली के लोगों को दहशत के वातावरण में रखना चाहता है?
पुलिस अधिकारी हालांकि बीते सप्ताह बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर हुए विस्फोट व गार्गी कॉलेज के बाहर मिले सुतली बम में किसी तरह की समानता से इनकार कर रहे हैं। हालांकि उनका मानना है कि मौजूदा माहौल में यह दहशत पैदा करने के लिए किसी शरारती तत्व का काम है। तो आईए हम आपको बता दें कि यह कोई पहली बार नहीं जब दिल्ली को दहलाने की कोशिश की गई है। पूर्व में भी ऐसा कई बार हो चुका है और पुलिस दहशतगर्द तक पहुंचने में नाकाम रही है।
वर्ष 2004 में आइआइटी के समीप देसी बम फटने से सनसनी फैल गई थी। जनवरी 2008 में आइआइटी के समीप ही सड़क पर फिर धमाका हुआ। स्कूटर सवार उसकी चपेट में आने से घायल हो गया था। मामले की जांच चल ही रही थी कि फरवरी 2008 में मालवीय नगर स्थित पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के समीप तथा लाडो सराय में तीन मिनट के अंतराल पर धमाके हुए। कम क्षमता वाले इन धमाकों की वजह से तीन गाडि़यां क्षतिग्रस्त हुई थीं।
जांच में पाया गया कि देसी बम में भरी कीलें धंसने से गाडि़यां क्षतिग्रस्त हुई थीं। सितंबर 2008 में महरौली में बाइकर्स द्वारा फेंके गए विस्फोटक से एक युवक की मौत और 17 घायल हो गए थे। स्पेशल सेल समेत तमाम एजेंसियों ने दक्षिण दिल्ली में चल रहे दहशत फैलाने के इस खेल की जांच की, मगर कुछ हासिल नहीं हुआ।
शुरुआत में पुलिस जांच बांग्लादेशी और बाद में स्थानीय बदमाशों के इर्द-गिर्द भी घूमी। जांच टीम पश्चिम बंगाल तक गई, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका। पिछले वर्ष अप्रैल में जामिया इलाके में कोरियर के माध्यम से भेजे गए बम फटने से भी एक व्यक्ति घायल हो गया था। आज तक यह मामला भी अनसुलझा है।












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