'आसानी से बात नहीं मानते विकसित देश'

प्रधानमंत्री ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की ज़रूरत है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार की प्रक्रिया लंबी है जिसके लिए विकासशील देशों को साथ आना होगा. भारत-अफ्रीका सम्मेलन के खत्म होने पर की गई प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुखिया के चुनाव के बारे में सवाल किया गया.
;उन्होंने कहा, “इसकी ताज़ा जानकारी तो मुझे नहीं है, लेकिन मैं ये समझता हूं कि आईएमएफ समेत सभी अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में सुधार अचानक नहीं हो सकता, ये एक लंबी प्रक्रिया है जिसके लिए विकासशील देशों को साथ आना होगा."
;प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में बदलते आर्थिक संतुलन और शक्ति समीकरणों के मद्देनज़र इन संस्थाओं में भी बदलाव की ज़रूरत है. उन्होंने कहा, “ये विकासशील देशों की प्राथमिकता है लेकिन हमें समझना होगा कि एक सीमा के बाद अंतर्राष्ट्रीय संबंध, शक्ति पर निर्भर करते हैं, और जिनके पास ताकत है वो आसानी से दूसरों की बात नहीं मानते."
;परंपरागत तरीक़े से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का मुखिया यूरोपिय यूनियन से ही चुना जाता रहा है. लेकिन अब यूरोप के बाहर के देशों ने ये मांग तेज़ कर दी है कि नया प्रमुख किसी उभरती हुई अर्थव्यवस्था से आना चाहिए. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पांच निदेशक जो कि ब्रिक्स देशों से आते हैं, (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका), ने एक साझा बयान जारी कर कहा है कि संस्था को अपने नेता के चुनाव के तौर तरीक़ो को बदलना चाहिए.
;पिछले सप्ताह अपने उपर बलात्कार के आरोप के बाद फ़्रांस के डोमनिक स्ट्रॉस कान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था जिसके बाद कल फ्रांस की वित्त मंत्री क्रिस्टीन लगार्दे ने इस पद के लिए अपनी दावेदारी का ऐलान कर दिया है.












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