बहादुरों का किया गया सम्मान

लखनऊ। बरेली के रोठा गांव की नीरज को गांव के बच्चे मदर टेरेसा का रूप मानते हैं। नीरज गावं के एक ऐसे स्कूल को चलाती है जिसे सुविधा के नाम पर कुछ नहीं तथा ग्रामीण स्कूल को अनाथ स्कूल के नाम से पुकारा करते थे। नीरज के इसी प्रयास का का नतीजा है कि जिस स्कूल में दो वर्ष पूर्व ताला लटकता था आज वहां बच्चे पढ़ते दिखायी देते हैं। नीरज को इस कार्य के लिए गॉडफ्रे फिलिप्स पुरस्कार से नवाजा गया। पुरस्कार पाने वालों में सिर्फ नीरज ही नहीं बल्कि पन्द्रह वर्ष की उम्र में रक्तदान कर रिकॉर्ड बनाने वाला दीपक व खनन माफिया के खिलाफ खड़े होने वाले अजय सिंह रावत का भी नाम प्रमुख है।
गत बीस वर्षों से बहादुरी के लिए प्रदान किए जाने वाले पुरस्कार को देते हुए संस्था के महासचिव हरमजीत सिंह ने बच्चों को बधाई दी। पुरस्कार पाने वालों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के कुल बारह बच्चे भी शामिल थे।
इस अवसर पर श्री सिंह ने बताया कि नीरज को यह पुरस्कार उनकी सामाजिक बहादुरी के लिए दिया गया जबकि दीपक कुमार ने कम उम्र जो कार्य कर दिखाया वह कार्य बुद्धिजीवी वर्ग के लोग करने से कतराते हैं। कार्यक्रम में उन्होंने अजय सिंह रावत के कार्य की जमकर सराहना की। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के अजय सिंह रावत ने लकड़ी और खनन माफिया के खिलाफ अभियान चलाया तथा पर्यावरण की रक्षा की। उनके प्रयास से ही नैनीताल में झील की सफाई हुई और उसके आसपास बड़े भवन निर्माण पर प्रशासन ने रोक लगायी।
पुरस्कार पाने वालों में शारीरिक बहादुरी पुरस्कार दिल्ली के पवन कुमार को दिया गया जो मु बई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में पैंट्री प्रभारी थे। उन्होंने अपनी बहादुरी के द्वारा एक बड़ी ट्रेन दुर्घटना को रोका था जिससे करीब 150 लोगों की जान बची। यदि उस वक्त श्री कुमार हि मत न दिखाते तो शायद भारी सं या में लोग आग की लपटों से झुलस जाते हालांकि ट्रेन में लगी आग से गाड़ी के 3 डिब्बे पूरी तरह से जल गये थे।
अगला नाम था दिल्ली में रिक्शा चलाने वाले सलीम का जिसने जामा मस्जिद के पास पर्यटकों को आतंकवादियों की गोलीबारी से बचाया। लखनऊ के शमशाद और उनकी बहन को एक व्यापारी की बहन को अपहरण से बचाने के लिये पुरस्कृत किया गया। उत्तराखंड के संतोष ङ्क्षसह नेगी को प्रखर बौद्धि क्षमता, माइंड आफ स्टील पुरस्कार से स मानित किया गया। संतोष के अंगों का विकास नहीं हो सका जिस कारण वह सामान्य जीवन नहीं जी सका बावजूद इसके उसने मां के मरने के बाद पूरे परिवार को संभाला और छोटे भाई बहन को शिक्षा दिलायी।
पदाधिकारियों ने बताया कि श्री नेगी इस समय स्नातकोत्तर और एमबीए की पढाई कर रहे हैं। उत्तराखंड के रईस अहमद को बस के ब्रेक फेल हो जाने पर यात्रियों को बचाने का श्रेय जाता है तथा उत्तर प्रदेश की अंजुम को अपनी सहेली को ट्रेन से बचाने के लिये पुरस्कृत किया गया।












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