सत्याग्रह से पहले हुई जीत, बाबा रामदेव की शरण में कांग्रेस

यूपीए-2 के दो वर्ष पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद माना कि विदेशी बैंकों में काला धन जमा है और वो धन इतना है कि उससे तीन पंचवर्षीय योजनाएं बनायी जा सकती हैं।
केंद्र को अब उन लोगों के नामों का खुलासा करना है, जिनका धन स्विस बैंक जैसे बैंकों में जमा है। पीएम का यह बयान साफ तौर पर केंद्र सरकार की बेबसी दर्शा रहा है। बाबा रामदेव और अन्ना हजारे जैसे नेताओं के बीच सरकार पूरी तरह घिर चुकी है।
जिस सरकार के खिलाफ बाबा रामदेव सत्याग्रह शुरू करने जा रहे हैं, उसी के नेता- केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ उनका समर्थन कर रहे हैं। सच पूछिए तो कांग्रेस नेताओं के पास उनका समर्थन करने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा है। रही बात दिग्विजय सिंह की जो बाबा की खिल्ली उड़ाते फिर रहे हैं, वो भी एक दिन बाबा की शरण में जरूर आ जाएंगे। हम आपको बता दें कि प्रणब मुखर्जी पहले ही बाबा के साथ हो लिये हैं।
यह सब सिर्फ हवाई बातें नहीं हैं, बल्कि बाबा का आत्मविश्वास यह बातें खुद बयान कर रहा है। शनिवार को एक टीवी चैनल को दिये गये साक्षात्कार में बाबा ने जिस कॉन्फिडेंस के साथ यूपीए की खिंचाई की, वो काबिल-ए-तारीफ था। वो अपने सत्याग्रह के लिए पूरी तरह अडिग हैं।
बाबा का कहना है कि अभी तक जो भ्रष्टाचार के संदर्भ में लोगों को पकड़कर जेल में बंद तो किया जा रहा है, लेकिन वसूली नहीं हो रही। हमारी मांग है कि उस धन की रिकवरी की जाये। सरकार का रुख सकारात्मक है, लेकिन रिकवरी कब होगी या नहीं कुछ पता नहीं।
रामदेव ने हाल ही में प्रधानमंत्री से मिलकर कहा कि विदेशों में गैरकानूनी तरीके से जमा धन को वापस लाया जाये। उसे राष्ट्रीय धरोहर की श्रेणी में जमा कर ले। धन को वापस लाने के तरीके भी बाबा ने बताये।












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