ऑनर किलिंग में सज़ा-ए-मौत ही होनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस मारकंडेय काट्जू और जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र की बेंच ने सोमवार को उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में बढ़ रहीं ऑनर किलिंग की वारदातों के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने ही बच्चों की योजनाबद्ध तरीके से हत्या कर देता है, तो वह एक जघन्य अपराध है। बेंच ने अपनी राय रखते हुए कहा कि ऐसे अपराध को रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस की श्रेणी में डालना ही उचित होगा। इसमें किसी भी प्रकार के अपराधों पर रोक लगाने का एक ही चारा है। वो है मौत की सज़ा। यदि इस पर कड़ी सजा नहीं दी गई, तो ऐसी वारदातें बढ़ती जायेंगी।
उम्मीद है सुप्रीम कोर्ट की इस राय से आप भी सहमत होंगे। आखिर क्यों ना हो सिर्फ अपने सम्मान की खातिर किसी की जान लेना उचित नहीं है। आइये एक नज़र डालते हैं ऑनर किलिंग की कुछ वारदातों पर।
2007 - हरियाणा के करनाल जिले में बबली और मनोज की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई, क्योंकि वे समान गोत्र के थे।
2008 - हरियाणा में एक व्यक्ति ने अपनी गर्भवती बेटी व उसके प्रेमी को मौत के घाट उतार दिया।
2009 - दिल्ली के गौरव सैनी और उसकी पत्नी मोनिका डागर की हत्या उन्हीं के परिजनों ने कर दी।
2010 - मई में निज़ामाबाद में एक युवती के घर वालों ने अपनी बेटी व उसके प्रेमी को पत्थर से मार-मार कर उनकी हत्या कर दी। सिर्फ इसलिए क्योंकि लड़की ऊंची जाति की थी।
2010 - जून में दिल्ली में परिजनों ने अपनी बेटी व उसके ब्वॉयफ्रेंड को, जाति भेद के कारण मार दिया।
2010 - जून में दिल्ली में मोनिका-कुलदीप ने घर के खिलाफ शादी कर ली, दोनों की जातियां भिन्न थीं, लिहाजा लड़की के भाईयों ने मिलकर दोनों को मौत के घाट उतार दिया।
2010 - जून में हरियाणा के भिवानी जिले में युव दंपत्ति को मारकर पेड़ से लटका दिया गया।
2010 - जून में ही अमृतसर में एक पिता ने अपनी सौतेली बेटी को सिर्फ इसलिए मार दिया, क्योंकि वो एक नीची जाति के युवक से प्रेम करती थी।
2011 - 2 मई को उत्तर प्रदेश के फरुखाबाद में राजीव-रेनू की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। वो दोनों अलग-अलग जातियों के थे।
2011 - 5 मई को आंध्र प्रदेश के महबूबनगर में घर वालों ने लड़की को जलाकर मार डाला। यहां भी जाति का फर्क था।












Click it and Unblock the Notifications