अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हैरानी किस बात की?

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र शर्मा के मुताबिक अगर कोई याचिका किसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भेजी जाती है तो कानूनीप्रावधान के तहत सुप्रीम कोर्ट स्थिति को संभालने के उद्देश्य से तत्काल प्रभाव से लोउर कोर्ट या हाई कोर्ट के फैसले पर स्टे आर्डर दे देती है और आदेश देती है जब तक वो कोई मसले या मुद्दे पर अपना फैसला नहीं सुनाती है तब तक यथा स्थिति बनाये रखे।
सु्प्रीम कोर्ट ने भी मंगलवार को यही किया, क्योंकि 30 सिंतबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अयोध्या के विवादित मसले को तीन भागों में बांटदिया था। उसने जहां रामलला की मूर्ति है उसे हिंदू महासभा को सौंप दिया था, जबकि रामचबूतरा और सीता रसोई निर्मोही अखाड़े के पास चली गई थी औरभूमि के बाकी बचे हिस्से सुन्नी वफ्फ बोर्ड को देदिये गये थे। जिसके बाद 180 दिनों के अंदर तीनों पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफयाचिका दायर की थी। जिसे कानूनी प्रावधान के तहत और देश में माहौल नाबिगड़े इसके चलते सर्वोच्च न्यायालय ने ये कदम उठाया है।
अभी सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने ये बात कही है, इसके बाद हाईकोर्ट फैसले को सुप्रीम कोर्ट की तीन बेंच को द्वार पढ़ा जायेगा जिस पर कोर्ट में बहस होगीऔर उसके बाद कोई फैसला सुनाया जायेगा। इस पूरे क्रम में काफी लंबा वक्त लग सकता है, इसलिए माहौल ना बिगड़े इसके लिए कोर्ट ने ये कदम उठाया है।इसलिए मीडिया में आ रही खबरें जिसमें कहा जा रहा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने हाई कोर्ट के फैसले को गलत ठहराया है वो अप्रासंगिक और पूरी तरहबेबुनियाद है क्योंकि कानून का मतलब संवेदनशीलता पैदा करना नहीं बल्कि संवेदनशील मुंद्दों को शांत करना है।
इसके अलावा एक बात और..कल सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनय कटियार ने कहा था कि वो अपील करते हैं अपने मुस्लिमभाईयों से कि अगर उन्हें समझ में आये तो वो आउट ऑफ कोर्ट सैटलमेंट कर सकते हैं, लेकिन यहां भी एक पेंच है जब कोई मामला कोर्ट में पहुँच जाता हैऔर किसी भी लिखित समझौते के लिए कोई याचिका दायर नहीं होती है तो कोई भी याची इस तरह का फैसला नहीं कर सकता है, यद्यपि समझौते के लिए हमेशा अदालत के दरवाजे खुले रहते हैं, लेकिन फिर भी कोई भी काम कानून के दायरे से होकर ही गुजरता है।












Click it and Unblock the Notifications