कई अन्‍य जिलों में पहुंची किसान संघर्ष की आग

Protest
लखनऊ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भूमि अधिग्रहण का विरोध एवं मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर ग्रेटर नोएडा में शुरू हुआ हिंसक संघर्ष आगरा तथा अलीगढ तक पहुंच गया। जिले के किसानों ने यमुना एक्सप्रेस-वे के विरोध में जे.पी. ग्रुप के कार्यालय में तोडफ़ोड़ की एवं कम्पनी मजदूरों की झोपडिय़ों तथा जेनरेट समेत कई शीनों को आग के हवाले कर दिया।

रविवार को किसानों का गुस्सा कई गुना बढ़ा और किसानों ने आगरा के एत्मादपुर के छलेसर में यमुना एक्सप्रेस-वे निर्माण कार्यस्थल पर चौगान एवं गढ़ी गांव में सुबह जे.पी. गु्रप ऑफ कंपनी द्वारा बनवायी जा रही दिवार गिरा दी। किसानों ने दीवार तोडऩे के अतिरिक्त यमुना एक्सप्रेस वे का निर्माण कर रहे जे.पी.ग्रुप के कैम्प कार्यालय पर धावा बोला और कार्यालय के निकट खड़े तीन वाहनों जेसीबी मशीन, जेनरेटर व तम्बु में आग लगा दी।

अधिकारियों ने घटना की सूचना पुलिस को दी जब तक पुलिस मौके पर पहुंचती ग्रामीणों ने कार्यालय को तहस नहस कर दिया। स्थिति को काबू में करने गये पुलिस दल पर किसानों ने पथराव किया और हवा में गोलियां चलाई। इस दौरान हुए पथराव में सात पुलिसकर्मी घायल हो गए। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। उधर अलीगढ जिले के टप्पल एवं घगोड़ी गांव में भी ग्रामीणों सडक पर जाम लगाकर जेपी ग्रुप के लिए काम करने वाले रहे मजदूरों की झोपडियों में आग लगायी और उन्हें कार्य स्थल से खदेड़ दिया।

किसानों का कहना था कि पुलिस उनके नेता मानवीर सिंह तेवतिया की हत्या करना चाहती है। ज्ञात हो कि शनिवार को ग्रेटर नोएडा के दनकोर इलाके के भट्टा पारसौल में पुलिस व किसानों के बीच जमकर हिंसक संघर्ष हुआ जिसमें कई किसानों को चोटें आयीं। पुलिस ने खेतों में कार्य कर रहे किसानों पर गोली बरसाई और उनकी पिटाई की। किसानों ने आरोप लगाया कि पुलिस कर्मियों ने उनकी फसल व ट्रेक्टर व इंजन में आग लगा दी।

सूत्रों का कहना है कि सरकार ने किसानों को जमीन के बदले 600 रुपये वर्गमीटर की दर पर मुआवजा दिया जबकि उसे निजी कम्पनी को 30 हजार रुपये की दर पर बेचा। किसानों ने जब मुआवजा बढ़ाने की मांग की तो उन पर लाठियां व गोलियां चलायी गयीं। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने यमुना एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, महामायानगर, मथुरा और आगरा के 1,187 गांवों के किसानों की लाखों हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया है। किसान संगठनों का आरोप है सरकार ने उनकी भूमि को कौडिय़ों के दाम पर लिया तथा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया। किसानों की मांग है कि उनकी भूमि का विकास कर 50 प्रतिशत भूमि उन्हें वापस की जाए।

उनकी भूमि पर जो भी योजना चल रही हैं उसमें किसानों को पचास प्रशित आरक्षण का लाभ दिया जाए। किसानों के आन्दोलन को देखते हुए राज्य सरकार ने पिछले दिनों अलीगढ़ के टप्पल में अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा बढ़ाने की घोषणा की थी। इसके बाद किसानों ने आन्दोलन समाप्त कर दिया था लेकिन मनवीर ङ्क्षसह तेवतिया के नेतृत्व में कुछ किसान अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर आन्दोलन पर उतर आए हैं।

दूसरी ओर राजनैतिक दलों ने इस मामले में आपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना भी शुरू कर दिया है। प्रदेश के विपक्षी दलों ने मांग की है कि ग्रेटर नोएडा एवं अन्य स्थानों पर मायावती सरकार द्वारा किसानों जो अत्याचार किए जा रहे हैं उसे रोका जाए तथा केन्द्र सरकार मामले में हस्तक्षेप करे। विपक्ष ने मृतकों के परिजनों को 10-20 लाख का मुआवजा दिए जाने की भी मांग कर दी। सभ्भ्ी विपक्षी दलों ने घोषणा की कि वे घटनास्थल पर जांच टीमें भेजकर हकीकत का पता लगाएंगे। उधर अखिल भारतीय किसान सभा ने प्रकरण की न्यायिक जांच की मांग कर दी है।

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