अन्ना हजारे और जनता की जीत: अख़बार

अंग्रेज़ी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी एक सीधी सरल सुर्खी से सारे मामले को समेटने की कोशिश की है. अख़बार की सुर्खी है “इंडिया विन्स अगेन." या भारत फिर जीता. अन्ना हज़ारे ने स्वयं इसे जनता की बड़ी जीत बताया है. अमर उजाला का कहना था कि आंदोलन की आंधी में सरकार झुकी और ग़ैर सरकारी व्यक्ति को सह अध्यक्ष बनाने पर राज़ी हुई. सुर्खी थी... “जीते अन्ना, जीती जनता."
दैनिक भास्कर ने भी अन्ना और अन्ना के समर्थन में जुड़ी भीड़ की तस्वीर लगाई और कहा “जनतंत्र की जीत." साथ ही अखबार ने एक लेख में कहा है कि एकजुट राष्ट्र की जीत का ये मात्र पहला पड़ाव है. भ्रष्टाचार के विरुद्ध असल युद्ध तो अब शुरु होगा. नवभारत टाइम्स कहता है “अन्ना की जीत, अनशन आज खत्म करेंगे." अखबार मे अनशन को जानी मानी हस्तियों और सोशल नेटवर्किंग साइट पर मिले भरपूर समर्थन की चर्चा की है.
द हिंदु ने एमएफ़ हुसैन का स्केच छापा है जिसमें भारत भ्रष्टाचार के शेर का वध कर रहा है. इंडियन एक्सप्रेस ने भूख हड़ताल के बाद जीत को शब्दों के सहारे खूबसूरती से पेश किया है. पत्र लिखता है “गवरनमेंट इटस इट्स वर्ड्स, हज़ारे टू ब्रेक फास्ट टूड़े. (government eats it's words)" यानि सरकार ने अपने शब्द खाए, हज़ारे आज तोड़ेंगे अपना व्रत.












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