अन्ना ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर कहा 'मैं बच्चा नहीं'
हजारे ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए जन लोकपाल विधेयक को संसद में लाए जाने की उनकी मांग केवल बिल को संसद में पेश किए जाने तक सीमित नहीं है। बल्कि इस विधेयक को लोकतांत्रिक तरीके से ड्राफ्ट किया जाना चाहिए अन्यथा राजनीतिज्ञ अपने बचने के रास्ते इस विधेयक के अंदर से भी निकाल लेंगे। उनका कहना है कि वह अपना आमरण अनशन तभी तोड़ेंगे जब यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी या प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खुद उनके पास आएंगे।
अन्ना हजारे ने जन लोकपाल विधेयक की मांग करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पांच-सूत्रीय खत भी लिखा है -
1. अन्ना हजारे ने मनमोहन सिंह के बहकाये जाने वाले बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए लिखा है कि वह कोई बच्चे नहीं है जो किसी के बहकावे में आकर आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। बल्कि इस तरह का बयान मेरे कॉमन सेंस का अपमान है।
2. हजारे ने लिखा है कि सरकार ने उन्हे बेहद बेचैन घोषित किया है लेकिन आजादी के 62 सालों के बाद भी हम सभी अभूतपूर्व भ्रष्टाचार के शिकार हो रहे हैं। पिछले 42 सालों से 8 बार जन लोकपाल विधेयक का बेहद कमजोर रूप संसद में पेश हो चुका है लेकिन वह भी कभी पारित नहीं किया गया। ऐसे में लोगों के सब्र का बांध टूटना तय है।
3. अन्ना हजारे ने ये भी मांग की है कि सरकार संसद में सिर्फ विेयक पेश कर दे सिर्फ इतने से उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती बल्कि वह सरकार से पूरी क्रियाविधि जानने और जानकारी दिए जाने की मांग करते हैं।
4. हजारे की मांग है कि विधेयक का ड्राफ्ट तय करने में आधे से अदिक जनप्रतिनिधि शामिल हों जिससे उसे प्रभावकारी और आम जनता के लिए जवाबदेह बनाया जा सके।
5. हजारे ने साफ लिखा है कि सरकार कह रही है कि अन्ना उनसे बात नहीं करना चाहते जबकि मेरे पास अब तक सरकार की ओर से से किसी आधिकारिक वार्ता की पेशकश नहीं रखी गई है।
इसलिए सरकार ऐसे कदम उठाए जिससे लोगों के बीच में ये संदेश जाए कि सरकार सच में भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए कुछ किए जाने की इच्छुक है।













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