हिन्‍दू नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ चैत्र नवरात्र शुरू

Maa Durga
नई दिल्ली। क्रिकेट विश्व कप जीत की खुशी की खुमारी अभी टूटी भी नहीं थी कि सोमवार को भारतीय नव वर्ष (विक्रमी संवत् 2068) की शुरुआत हो गई। नव संवत्सर का स्वागत लोगों ने धूमधाम से किया। देश के अलग-अलग हिस्सों में उगाडि, गुड़ी पड़वा और चेट्टी चंड मनाया गया, जबकि उत्तर भारत में चैत्र नवरात्र की शुरुआत हुई।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित देशभर में सोमवार को चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो गई। पहले दिन माता वैष्णो देवी के दरबार में एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे। हर साल इस खास अवसर पर यहां इसी तरह भक्तों का तांता लगता है। अयोध्या और वाराणसी के विभिन्न मंदिरों में भी नवरात्र की शुरुआत के अवसर पर विशेष धूमधाम रही।

नव संवत्सर के अवसर पर अयोध्या में राम जन्मोत्सव के लिए रामलला का साज-श्रृंगार किया गया। इस दिन से अयोध्या में एक महीने तक चलने वाले मेले की शुरुआत होती है। महाराष्ट्र में मुम्बई सहित पूरे राज्य में गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया गया। सुखद भविष्य की कामना में लोगों ने रंगोली बनाई और घरों को सजाया।

गुड़ी पड़वा हिंदू महीने चैत्र के पहले दिन मनाया जाता है। इस अवसर पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, द्वार पर रंगोली बनाते हैं और दरवाजों को आम की पत्तियों व गेंदे के फूलों से सजाते हैं। इस दिन घरों के आगे एक-एक 'गुड़ी' या झंडा रखा जाता है और उसके साथ स्वास्तिक चिन्ह वाला एक बर्तन व रेशम का कपड़ा भी रखा जाता है। लोग पारम्परिक वस्त्र पहनते हैं। महिलाएं नौ गज लम्बी साड़ी पहनती हैं।

महाराष्ट्र में कई परिवार 'गुड़ी' के चारों ओर घूम-घूमकर पारम्परिक प्रार्थनाएं करते हैं। परम्परा के अनुसार ज्यादातर परिवारों में नीम की पत्तियों, गुड़ और इमली से बना पकवान खाते हैं। माना जाता है कि इससे खून साफ होता है और शरीर का प्रतिरोधक तंत्र मजबूत होता है।

इस मौके पर राज्यभर में मराठी संस्कृति और परम्परा को प्रदर्शित करते जुलूस निकाले गए। दादर, विले पार्ले और अंधेरी सहित मुम्बई के कई इलाकों में मोटरसाइकिल रैलियां और शोभा यात्राएं निकाली गईं। गुड़ी पड़वा, चैत्र गौरी और राम नवरात्र का शुरुआती दिन है। चैत्र गौरी महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है, इस दिन हल्दी-कुमकुम का आयोजन होता है।

आंध्र प्रदेश, कर्नाटक में उगाडि पर्व की धूम रही। तमिलनाडु में रहने वाले आंध्रवासियों और कन्नड़ लोगों ने भी सोमवार को पारम्परिक उत्साह के साथ तेलुगू व कन्नड़ नव वर्ष मनाया।

लोगों ने इस पवित्र दिन सुबह की शुरुआत विशेष पूजा-अर्चना से की और बाद में रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों के बीच उगाडि पर बनने वाले खास पकवान वितरित किए। सभी ने अपने-अपने घरों के बाहर और द्वार पर सुंदर रंगोली बनाई। भगवान के आगे स्वर्ण आभूषण रखे गए।

इस पर्व का मुख्य पकवान उगाडि पच्चिडी है। इसे छह विभिन्न भावनाओं को प्रदर्शित करने वाले तत्व- नीम के फूल, गुड़, आम, हरी मिर्च, नमक और इमली के रस से बनाया जाता है। इसे पड़ोसियों, दोस्तों व रिश्तेदारों में वितरित किया जाता है।

चैत्र नवरात्र के पहले दिन बिहार की राजधानी पटना के पटन देवी सहित राज्य के सभी देवी मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। कई घरों में लोगों ने पूरे भक्ति भाव से कलश स्थापना कर नवरात्र की शुरुआत की। इस दौरान पहले दिन भक्तों ने दुर्गा मां के पहले स्वरूप शैल पुत्री की अराधना की।

उल्लेखनीय है कि महाराज विक्रमादित्य ने आज से 2068 वर्ष पूर्व राष्ट्र को सुसंगठित कर शकों की शक्ति का उन्मूलन कर यवन, हूण, तुषार तथा कम्बोज देशों पर अपनी विजय पताका फहराई थी। उसी विजय की स्मृति में नया संवत्सर मनाया जाता है। इस दिन पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर पूरा करती है तथा दिन-रात बराबर होते हैं। इसके बाद से ही रात्रि की अपेक्षा दिन बड़ा होने लगता है।

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