भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है पूरा उत्तर भारत
जी हां दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश से लेकर कश्मीर तक सभी राज्य भूकंप की दृष्टि से संवदेनशील हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एडवांस स्टडीज इन जियोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डा. ध्रुव सेन सिंह मुताबिक भूकंप के प्रति संवेदनाशीलता को देखते हुए भारत को चार जोन में बांटा गया है, जिसमें सबसे ज्यादा संवेदनशील जोन पांच है, जिसमें कश्मीर, पंजाब, पश्चिमी हिमालय और गुजरात के कुछ इलाके आते हैं।
भारत की करें तो भारत का दक्षिणी हिस्सा उत्तर की ओर निरंतर खिसक रहा है, जिस वजह से उत्तरी भारत के सभी हिस्से भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील हैं। उत्तर भारत में कभी भी भूकंप के झटकों का असर दिख सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी भूगर्भिक गतिविधि का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है, इसलिए समय नहीं बताया जा सकता है। रही बात एशिया के अन्य इलाकों में भूकंप की तो वो अभी जारी रहेंगे।
कुछ हद तक सेफ हैं यूपी, बिहार
डा. सिंह की मानें तो उत्तर भारत भले ही भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है, लेकिन गंगा के तट पर बसे उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों ही कुछ हद तक सुरक्षित हैं। इसका कारण यहां जमीन के अंदर रेतीली मिट्टी की मोटी परत है। जी हां मिट्टी की यही परत भूकंप के दौरान धरती के अंदर होने वाले कंपन को कम कर देती है, जिस वजह से जमीन की सतह पर कंपन का प्रभाव ज्यादा नहीं होता।
एशिया में भूकंप आम बात
डा. सिंह का कहना है कि जापान में भूकंप के पहले चीन में कई बार भूकंप आये। यही नहीं चीन, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया, आदि से आये दिन भूकंप की खबरें मिलती रहती हैं। असल में इन सभी का सबसे बड़ा कारण दक्षिणी एशिया की टेक्टॉनिक्स (जमीन के नीचे की प्लेट) का खिसकना है। दक्षिण एशिया की टेक्टॉनिक्स उत्तर की ओर खिसक रही हैं। इसकी गति भले ही काफी धीमी है, लेकिन इससे उठने वाले कंपन का असर भूकंप के रूप में दिखता रहता है।













Click it and Unblock the Notifications