सीवीसी की नियुक्ति बनीं मज़ाक अब हो रही लीपा-पोती

PJ Thomas
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार के मामले में कथित तौर पर संलिप्तता रहने पर केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) पीजे थॉमस की नियुक्ति को रद्द किये जाने के बाद थॉमस ने अपना इस्‍तीफा तो राष्‍ट्रपति को भेज दिया, लेकिन उसके बाद जो शुरू हुआ वो वाकई में शर्मनाक है। कांग्रेस और भाजपा के बीच घमासान शुरू हो गया है, जिसमें भाजपा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लपेटे में ले लिया है। ऐसे में कांग्रेस लीपा-पोती करने में जुटी हुई है, ताकि उसकी छवि साफ हो सके।

भाजपा ने मनमोहन सिंह से इस बारे में संसद में जवब देने को कहा है, जबकि कानून मंत्री ने प्रधानमंत्री का खुलकर बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कोई गैर कानूनी कार्य नहीं किया।

भाजपा, वाम दलों के प्रहार

फैसले के बाद गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों सहित विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने संप्रग सरकार पर निशाना साधा। भाजपा ने सीवीसी की नियुक्ति रद्द किए जाने के फैसले को संप्रग सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा आघात बताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इसके लिए जिम्मेदार
ठहराया।

भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री इस मसले पर तत्काल स्पष्टीकरण दें कि उनकी सरकार ने विपक्ष के विरोध के बावजूद थॉमस को सीवीसी नियुक्त करने में जल्दबाजी में क्यों थी? भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री की विश्वसनीयता को धक्का पहुंचा है। वहीं भाजपा नेता और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि न्यायालय के फैसले से सीवीसी पद की गरिमा बच गई है।

जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदम्बरम इस मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें। वहीं मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने वहीं फैसला दिया है जिसकी मांग विपक्ष थॉमस को सीवीसी नियुक्त किए जाने के पहले दिन से ही कर रहा था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री इस मले में स्पष्टीकरण दें।

कांग्रेस ने किया बचाव

सत्तारूढ़ कांग्रेस ने कहा कि थॉमस की नियुक्ति रद्द किया जाना प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर कोई आघात नहीं है और पार्टी न्यायालय के फैसले का अध्ययन करेगी। कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा, "हम सीवीसी की नियुक्ति के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का अध्ययन करेंगे। यह प्रधानमंत्री पर कोई आघात नहीं है।"

वहीं केंद्रीय कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने कहा कि, "फिलहाल हम कुछ कहने की स्थिति में नही हैं। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी उनकी नियुक्ति को अवैध ठहराया है।" प्रधानमंत्री द्वारा देश से माफी मांगे जाने की संभावना के सवाल पर मोइली ने कहा, "प्रधानमंत्री ने कोई अवैध काम नहीं किया है। वह इस मामले में पूरी तरह से स्पष्ट रहे हैं..इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया है और यदि प्रक्रिया पर सवाल उठा है तो इसमें संशोधन किया
जाएगा।"

"कार्यपालिका के कई निर्णयों को पहले भी सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है और न्यायालय ने आदेश जारी किए हैं। मुझे नहीं लगता कि इसके ज्यादा अर्थ लगाए जाने चाहिए। हम आदेश पर कार्रवाई कर रहे हैं। इस समय हम नहीं कह सकते कि यह किसी के पक्ष या विपक्ष में है, इसे केवल एक निर्णय की तरह देखा जाना चाहिए। हम निर्णय का अध्ययन कर रहे हैं।"

वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने थामस की नियुक्ति को अवैध ठहराए जाने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि वह इस मामले पर संसद में बयान देंगे। संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं न्यायालय के फैसले का सम्मान करता हूं और इस मामले में संसद में बयान दूंगा।"

सर्वोच्च न्यायालय ने छह माह पहले सीवीसी के पद पर की गई थॉमस की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। थॉमस को तीन सितम्बर 2010 को प्रधानमंत्री सहित तीन सदस्यों की उच्च स्तरीय समिति ने सीवीसी नियुक्त किया गया था। भ्रष्टाचार के मामले में नाम होने के चलते सीवीसी के रूप में थॉमस का पूरा कार्यकाल विवादों में रहा।

वर्ष 1992 में केरल में कथित पाम तेल आयात घोटाला सामने आने के समय थॉमस केरल के नागरिक आपूर्ति सचिव थे। इस मामले में वर्ष 1999 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और थॉमस के साथ अन्य लोगों के खिलाफ देश को 2.32 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे। थॉमस केरल कैडर के वर्ष 1973 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। वह इससे पहले दूरसंचार सचिव रह चुके हैं।

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