राजेश, नूपुर ने अपने बचाव में जमा किया हलफनामा

गाजियाबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने इस महीने की शुरुआत में राजेश और नूपुर तलवार को आरुषि की हत्या का आरोपी बनाते हुए जांच एजेंसी को उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
सीबीआई की विशेष दंडाधिकारी प्रीती सिंह ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि राजेश और नूपुर तलवार यदि 22 मार्च को होने वाली सुनवाई में अनुपस्थित रहते हैं तो प्रत्येक पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके पहले राजेश और नूपुर तलवार ने मुकदमे की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट मांगने के लिए अदालत में आवेदन जमा किया।
राजेश तलवार ने वकील सतीश टमटा के जरिए अदालत में अपना आवेदन जमा किया। आवेदन में तलवार ने कहा कि तबियत खराब होने के चलते वह सोमवार की सुनवाई में उपस्थित होने में असमर्थ हैं। नूपुर तलवार ने अपने आवेदन में कहा कि चूंकि उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष हाजिर होना है इसलिए वह अदालत के समक्ष पेश नहीं हो सकतीं।
इसके ठीक बाद जमा किये गए पूरक हलफनामे में दावा किया कि जांच के दौरान कई तथ्य उजागर हुए थे, लेकिन जांच एजेंसी ने उन्हें नजरअंदाज़ कर दिया। उनका दावा है कि हत्याकांड से जुड़े डीएनए परीक्षण के निष्कर्ष में कहा गया था कि उनके घर की छत और घर में पाई गई व्हिस्की की बोतल और नौकर कृष्णा बिस्तर पर पाये गए अंगुलियों के निशान एक ही व्यक्ति के थे।
दंपती का आरोप है कि आरुषि का कंप्यूटर सीबीआई ने जांच के लिए जब्त कर लिया था। उन्हें कंप्यूटर की एक बार फिर जांच होनी चाहिए, ताकि पता चल सके कि इंटरनेट किसने ऑन किया। आरुषि की मौत के वक्त कंप्यूटर पर इंटरनेट चालू था। तलवार दंपत्ति का दावा है कि नुपुर के खिलाफ कोई सबूत नहीं था लिहाजा उनके खिलाफ केवल धारा 319 के तहत ही कार्रवाई कर सकती है।












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