पिछले सप्ताह 100000 लोगों का लीबिया से पलायन : संयुक्त राष्ट्र
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार अधिकांश शरणार्थियों ने पड़ोस के ट्यूनीशिया व मिस्र में शरण लिया है। इन दोनों देशों में भी पिछले महीनों में हुई क्रांतियों के कारण वहां के शासकों को गद्दी छोड़नी पड़ी थी।
संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी मामलों के उच्चायुक्त एंटोनियो गटरस ने रविवार को जेनेवा से एक बयान में कहा, "हम लीबिया से भाग रहे हरेक व्यक्ति को मदद पहुंचाने के लिए ट्यूनीशिया व मिस्र की सहायता करने हेतु प्रतिबद्ध हैं। हम अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आह्वान करते हैं कि इन सरकारों को इस मानवीय आपात स्थिति से निपटने में सक्षम बनाने के लिए तत्काल आगे आएं।"
ट्यूनीशिया सरकार ने शनिवार को कहा था कि 20 फरवरी से अब तक 40,000 लोग सीमा पार कर चुके हैं। यूएनएचसीआर ने अनुमान लगाया है कि रविवार की रात 10,000 अतिरिक्त लोगों ने सीमा पार किया हैं। इन 50,000 लोगों में लगभग 18,000 ट्यूनीशियाई, 15,000 मिस्र वासी, 2,500 लीबियाई और लगभग 2,000 चीनी नागरिक शामिल हैं।
इसके अलावा 55,000 लोग मिस्र के लिए पलायन कर गए हैं। इसमें 46,000 मिस्र वासी, 2,100 लीबियाई और 6,900 अन्य देशों के, खासतौर से एशियाई नागरिक शामिल हैं।
मिस्र की सीमा पार कर लीबिया पहुंचे यूएनएचसीआर के कर्मचारियों ने पुलिस एवं सेना के उन कर्मियों से सम्पर्क किया है, जिन्होंने लीबियाई नेता मुअम्मार गद्दाफी का साथ छोड़ दिया है।
यूएनएचसीआर, स्थानीय जनजातियों एवं पूर्वी लीबिया के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है। पूर्वी लीबिया इस समय विपक्ष के नियंत्रण में है। लेकिन इस क्षेत्र को तत्काल मानवीय मदद की आवश्यकता है। लोगों को भोजन और चिकित्सकीय सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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