लीबिया संकट : 500 भारतीय दिल्ली पहुंचे, अन्य पहुंचने की प्रक्रिया में (राउंडअप)

इसके अलावा एयर इंडिया की दो अन्य उड़ानें भी फंसे भारतीयों को निकालने के लिए रविवार को प्रस्थान कर रही है, साथ ही भारतीय नौसेना के दो पोतों के अलावा एक चार्टर्ड यात्री पोत भारतीय नागरिकों की सकुशल वापसी सुनिश्चित कराने के लिए लीबिया के लिए प्रस्थान कर रहा है।

सरकार ने कहा है कि लीबिया से लौटे सभी 530 नागरिक स्वस्थ एवं प्रसन्न हैं।

स्वदेश लौटे कई यात्रियों ने वहां जारी हत्याओं, प्रताड़नाओं, भय व निराशा के डरावने किस्से बयान किए हैं। कुछ ने कहा है कि उन्हें बिना भोजन-पानी के रहना पड़ा। ऐसे लोगों ने दोबारा कभी भी लीबिया न लौटने का संकल्प लिया है।

एयर इंडिया के दो विशेष विमानों से दिल्ली पहुंचे भारतीयों को उनके परिजनों ने गले लगाया और उनका माथा चूमा। लीबिया से अपनी जान लेकर भागे लोगों ने अपना बाकी सबकुछ वहीं छोड़ दिया।

लौट रहे कई नागरिकों के चिंतित रिश्तेदार इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे (आईजीआईए) के टर्मिनल 2 के बाहर बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। नागरिकों ने लुटने से लेकर कई दिनों से बिना भोजन-पानी के जिंदा रहने के डरावने किस्से सुनाए।

लीबिया में एक कम्पनी में बतौर इंजीनियर कार्यरत रहे मोहम्मद सलाई (63) ने कहा, "उन्होंने हमारे सारे सामान लूट लिए। मोबाइल फोन, पैसे, लैपटाप और मेरी कार सबकुछ। गोलियों की आवाज सुनने के तत्काल बाद हम एक कंटेनर के नीचे चले गए और वहां 45 मिनट तक दुबके रहे। किसी तरह हम वहां से बच कर भागे।" सलाई वहां एक कम्पनी में बतौर इंजीनियर कार्यरत थे।

बोइंग 747 की पहली उड़ान 291 भारतीयों को लेकर शनिवार लगभग आधी रात को यहां पहुंची। दूसरी उड़ान में एयरबस ए 330 में सवार होकर 237 भारतीय नागरिक लीबिया की राजधानी त्रिपोली से रविवार सुबह 4.10 बजे यहां पहुंचे।

विदेश राज्य मंत्री ई.अहमद और विदेश सचिव निरूपमा राव भारतीय नागरिकों की अगवानी के लिए हवाईअड्डे पर मौजूद थे।

विदेश मंत्रालय ने यहां कहा, "सभी नागरिक स्वस्थ एवं प्रसन्न हैं। यात्रियों में बड़ी संख्या में महिलाएं एवं बच्चे शामिल हैं।" ज्ञात हो कि लीबिया में लगभग 18,000 भारतीय नागरिक निवास करते रहे हैं। इनमें पेशेवर, चिकित्सक एवं इंजीनियर शामिल हैं।

नागरिकों के हवाईअड्डे पर पहुंचने के साथ ही हवाईअड्डे के टर्मिनल 2 पर 10 राज्य सरकारों की ओर से स्थापित किए गए सहायता डेस्क ने उनका स्वागत किया। उन्हें भोजन, आश्रय, परिवहन मुहैया कराया गया तथा सभी की चिकित्सकीय जांच की गई। इसके बाद लोगों को उनके मूल स्थान तक भेजने के लिए आगे के यात्रा बंदोबस्त किए गए। ये सभी सुविधाएं नि:शुल्क मुहैया कराई जा रही हैं।

एयर इंडिया की दो अन्य उड़ानें भी रविवार को लीबिया के लिए प्रस्थान कर रही हैं। ये दोनों उड़ानें भी वहां से 500 से अधिक भारतीय नागरिकों को लेकर वापस लौटेंगी।

इसके अलावा 67 भारतीय, गल्फ एयर के एक विमान से सोमवार सुबह मुम्बई पहुंच रहे हैं। ये सभी नागरिक सड़क मार्ग से सीमा पार कर मिस्र पहुंच चुके हैं। इनमें 11 बच्चे और दो नवजात शिशु शामिल हैं। ये सभी लीबिया के तबरौक से शनिवार दोपहर को मिस्र के सालौम पहुंचे थे।

गल्फ एयर की जीएफ-056 उड़ान का बंदोबस्त किया है, जो सोमवार सुबह 5.05 बजे मुम्बई पहुंच जाएगी।

एयर इंडिया की पहली उड़ान से आए मोबिन कुरैशी (27) ने कहा, "कई सारे भारतीय अभी भी वहां है, जो पिछले चार-पांच दिनों से बगैर कुछ खाए पड़े हुए हैं। वहां भोजन, पानी की कोई सुविधा नहीं है और स्थिति बेहर खराब है।" कुरैशी वहां एक कारखाने में काम करता था।

भारतीयों ने सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित कराने के लिए अधिकारियों को धन्यवाद दिया। लेकिन वे इस बात को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे थे कि लीबिया में अभी भी कई सारे देशवासी हैं।

कई सारे नागरिक अपना सबकुछ छोड़ कर वापस आ गए हैं, लेकिन वे अब वापस लीबिया नहीं जाना चाहते।

एक महिला ने कहा, "हम अपना सबकुछ वहां छोड़कर वापस आ गए हैं.. लेकिन अब वहां वापस लौटने की कोई योजना नहीं है, भले ही वहां शांति क्यों न स्थापित हो जाए।"

एक अन्य यात्री ने कहा, "दिक्कत मुख्य रूप से त्रिपोली के बाहर है। हम लोग संकट में नहीं थे, लेकिन इस बात का भय तो था कि निकट भविष्य में यह संकट त्रिपोली में हम तक पहुंच सकता है।"

एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "पहला विमान, बोइंग 747, 291 यात्रियों को त्रिपोली से लेकर यहां रात 11.55 बजे पहुंचा। इस विमान ने यहां से शाम 4.30 बजे लीबिया के लिए उड़ान भरा था।"

विमान को हवाईअड्डे के अंतर्राष्ट्रीय टर्मिनल के बगल में टर्मिनल 2 पर लाया गया। इस टर्मिनल को फिलहाल हज यात्रा जैसे विशेष उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस टर्मिनल को दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (डीआईएएल) से पट्टे पर लिया गया है। डीआईएल ही हवाई अड्डे का संचालन करती है।

अहमद ने घोषणा की कि लीबिया से लौटने वाले सभी भारतीयों को उनके मूल स्थान तक पहुंचाने के लिए सरकारी खर्च पर सभी बंदोबस्त किए गए हैं।

अहमद ने कहा, "मंत्रालय ने यात्रियों के लिए सभी बंदोबस्त किए हैं.. आपको एक पैसा भी खर्च नहीं करना है।"

राव ने संवाददाताओं को बताया कि एयर इंडिया के विशेष विमानों से लीबिया से लौट रहे भारतीय नागरिकों की अगवानी करने के लिए वह हवाई अड्डे पर गई थीं। प्रवासी भारतीय मामलों के सचिव ए.दीदार सिंह भी अन्य कई अधिकारियों के साथ वहां मौजूद थे।

इस बीच भारतीय नौसेना के तीन पोतों ने भी 18,000 भारतीयों को वहां से निकालने में मदद देने हेतु लीबिया के लिए प्रस्थान किया है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भूमध्य सागर में स्थित एक यात्री पोत को नागरिकों को निकालने के लिए रवाना कर दिया गया है और उम्मीद है कि वह सोमवार को बेनघाजी पहुंच जाएगा।

आईएनएस जलश्व और आईएनएस मैसूर चिकित्सकीय सुविधाओं से लैस हैं। इसमें ऑपरेशन थिएटर, चिकित्सक और अर्धचिकित्सकीय कर्मचारी शामिल हैं। दोनो पोत मुम्बई से प्रस्थान करने को तैयार हैं। पोत पर हेलीकॉप्टर और विशेष बलों के जवान भी सवार हैं।

एक अन्य पोत, आईएनएस आदित्य बचाव पोतों की मदद के लिए उनके साथ है।

एक अधिकारी ने कहा कि ये पोत भारतीयों को लीबिया से लेकर या तो माल्टा जाएंगे या मिस्र। उसके बाद वहां से उन्हें उड़ानों के जरिए भारत लाया जाएगा। बचाव पोत 10 दिनों के भीतर लीबिया पहुंच जाएंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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