मादा पक्षियों की मौजूदगी में सुरीला गाते हैं किशोर पक्षी
शोध का निष्कर्ष बताता है कि कैसे सामाजिक कारक मनुष्य को भाषा और अन्य प्रेरक कौशल को सीखने के तरीकों को जानने में अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकते हैं। इसके जरिये मस्तिष्काघात से ग्रस्त लोगों के इलाज के लिए नई उम्मीद जगी है।
पत्रिका 'नेशनल अकेडमी ऑफ साइंस' में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक किशोर पक्षी भी मनुष्यों की तरह पहले युवा पक्षियों को सुनकर गाना सीखते हैं। युवा पक्षियों की नकल करते हुए किशोर पक्षी गलती और सुधार के सिद्धांत को अपनाते हुए अपना सीखना जारी रखते हैं।
कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के एक बयान के अनुसार पक्षियों के जानकार और वैज्ञानिकों का अब तक ऐसा मानना रहा है कि किशोर पक्षी सुरीला नहीं गाते हैं।
वैज्ञानिकों ने जेबरा पक्षी के गीत पर अपना शोध किया। उन्होंने उसके गीत की रिकार्डिग करने के बाद उसका अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि एक मादा पक्षी की मौजूदगी में पक्षियों ने ज्यादा सुरीला गाया।
कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय में मनोरोग और शरीर विज्ञान के प्रोफेसर एवं शोध के वरिष्ठ लेखक एलिसन डूप ने कहा, "हम इस निष्कर्ष को पाकर काफी चकित हैं।
उन्होंने कहा, "पक्षियों ने अच्छा प्रदर्शन करने के लिए गीत के सबसे अच्छे संस्करण को चुना और उन्होंने गीत को कई दफे गाया। उनके गीत सुनने में युवा पक्षियों की तरह थे। इससे पता चलता है कि किशोर पक्षी जितना हमें बताते हैं वे उससे कहीं अधिक जानते हैं।"
इस शोध के निष्कर्ष से मस्तिष्क की प्रक्रिया, सहायक भाषा और सीखे गए व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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