डरावने किस्सों के साथ लीबिया से लौटे 500 भारतीय (लीड-4)
एयर इंडिया के दो विशेष विमानों से राजधानी दिल्ली पहुंचे भारतीयों को उनके परिजनों ने गले लगाया और उनका माथा चूमा। लीबिया से अपनी जान लेकर भागे लोगों ने अपना बाकी सबकुछ वहीं छोड़ दिया है।
लौट रहे कई नागरिकों के चिंतित रिश्तेदार इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे (आईजीआईए) के टर्मिनल 2 के बाहर बेशब्री से इंतजार कर रहे थे। नागरिकों ने लुटने से लेकर कई दिनों से बिना भोजन-पानी के जिंदा रहने के डरावने किस्से सुनाए।
एक अन्य भारतीय मोहम्मद सलाई (63) ने कहा, "उन्होंने हमारे सारे सामान लूट लिया। मोबाइल फोन, पैसे, लैपटाप और मेरी कार सबकुछ। गोलियों की आवाज सुनने के तत्काल बाद हम एक कंटेनर के नीचे चले गए और वहां 45 मिनट तक दुबके रहे। किसी तरह हम वहां से बच कर भागे।" सलाई वहां एक कम्पनी में बतौर इंजीनियर कार्यरत थे।
बोइंग 747 की पहली उड़ान 291 भारतीयों को लेकर शनिवार लगभग आधी रात को यहां पहुंची।
दूसरी उड़ान में एयरबस ए 330 में सवार होकर 237 भारतीय नागरिक लीबिया की राजधानी त्रिपोली से रविवार सुबह 4.10 बजे यहां पहुंचे।
विदेश राज्य मंत्री ई.अहमद और विदेश सचिव निरूपमा राव भारतीय नागरिकों की अगवानी के लिए हवाईअड्डे पर मौजूद थे।
एयर इंडिया की दो अन्य उड़ानें भी दिन में लीबिया के लिए प्रस्थान करने वाली हैं। ये दोनों उड़ानें भी वहां से 500 से अधिक भारतीय नागरिकों को लेकर वापस लौटेंगी।
एयर इंडिया की पहली उड़ान से आए मोबिन कुरैशी (27) ने कहा, "कई सारे भारतीय अभी भी वहां है, जो पिछले चार-पांच दिनों से बगैर कुछ खाए पड़े हुए हैं। वहां भोजन, पानी की कोई सुविधा नहीं है और स्थिति बेहर खराब है।" कुरैशी वहां एक कारखाने में काम करता था।
भारतीयों ने सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित कराने के लिए अधिकारियों को धन्यवाद दिया। लेकिन वे इस बात को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे थे कि लीबिया में अभी भी कई सारे देशवासी पड़े हुए हैं।
कई सारे नागरिक अपना सबकुछ छोड़ कर वापस आ गए हैं, लेकिन वे अब वापस लीबिया नहीं जाना चाहते।
एक महिला ने कहा, "हम अपना सबकुछ वहां छोड़कर वापस आ गए हैं.. लेकिन अब वहां वापस लौटने की कोई योजना नहीं है, भले ही वहां शांति क्यों न स्थापित हो जाए।"
एक अन्य यात्री ने कहा, "दिक्कत मुख्य रूप से त्रिपोली के बाहर है। हम लोग संकट में नहीं थे, लेकिन इस बात का भय तो था कि निकट भविष्य में यह संकट त्रिपोली में हम तक पहुंच सकता है।"
नागरिक ने कहा, "हम निजी कम्पनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए दूरवर्ती शिविरों में रहने वालों को लेकर चिंतित हैं।"
एक चिकित्सक, सज्जन लाल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कई भारतीय पीड़ा के दौर से गुजर रहे थे। इस संकट में भोजन और पानी तक की आपूर्ति ठप्प हो गई थी। लाल ने संवाददाताओं से कहा, "पीने के लिए पानी नहीं था, भोजन की आपूर्ति बंद हो गई थी।"
रविवार को यहां पहुंची उड़ानें उन श्रृंखलाबद्ध उड़ानों का हिस्सा हैं, जिनकी योजना लीबिया में फंसे कोई 18,000 भारतीयों को निकालने के लिए बनाई गई है। लीबिया में मध्य फरवरी से गद्दाफी विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं।
विपक्षी समूहों ने कुछ शहरों पर कब्जा कर लिया है और गद्दाफी को सत्ता से उखाड़ फेकने का संकल्प लिया है। गद्दाफी 1969 से ही सत्ता पर काबिज हैं।
एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "पहला विमान, बोइंग 747, 291 यात्रियों को त्रिपोली से लेकर यहां रात 11.55 बजे पहुंचा। इस विमान ने यहां से शाम 4.30 बजे लीबिया के लिए उड़ान भरा था।"
विमान को इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे (आईजीआईए) के अंतर्राष्टीय टर्मिनल के बगल में टर्मिनल 2 पर लाया गया। इस टर्मिनल को फिलहाल हज यात्रा जैसे विशेष उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस टर्मिनल को दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (डीआईएएल) से पट्टे पर लिया गया है। डीआईएल ही हवाई अड्डे का संचालन करती है।
अहमद ने घोषणा की कि लीबिया से लौटने वाले सभी भारतीयों को उनके मूल स्थान तक पहुंचाने के लिए सरकारी खर्च पर सभी बंदोबस्त किए गए हैं।
अहमद ने कहा, "मंत्रालय ने यात्रियों के लिए सभी बंदोबस्त किए हैं.. आपको एक पैसा भी खर्च नहीं करना है।"
राव ने संवाददाताओं को बताया कि एयर इंडिया के विशेष विमानों से लीबिया से लौट रहे भारतीय नागरिकों की अगवानी करने के लिए वह हवाई अड्डे पर गई थीं। प्रवासी भारतीय मामलों के सचिव ए.दीदार सिंह भी अन्य कई अधिकारियों के साथ वहां मौजूद थे।
अधिकारियों ने कहा कि लौटने वाले भारतीय नागरिकों के लिए विशेष बंदोबस्त किए गए हैं। उनके लिए भोजन के साथ ही टेलीफोन सेवा सुलभ कराई गई है, ताकि वे अपने परिजनों से सम्पर्क कर सकें।
इस बीच भारतीय नौसेना के तीन पोतों ने भी 18,000 भारतीयों को वहां से निकालने में मदद देने हेतु लीबिया के लिए प्रस्थान किया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भूमध्य सागर में स्थित एक यात्री पोत को नागरिकों को निकालने के लिए रवाना कर दिया गया है और उम्मीद है कि वह सोमवार को बेनगाजी पहुंच जाएगा।
आईएनएस जलश्व और आईएनएस मैसूर चिकित्सकीय सुविधाओं से लैश हैं। इसमें ऑपरेशन थिएटर, चिकित्सक और अर्धचिकित्सकीय कर्मचारी शामिल हैं। दोनो पोत मुम्बई से प्रस्थान करने को तैयार हैं। पोत पर हेलीकॉप्टर और विशेष बलों के जवान भी सवार हैं।
एक अन्य पोत, आईएनएस आदित्य बचाव पोतों की मदद के लिए उनके साथ है।
एक अधिकारी ने कहा कि ये पोत भारतीयों को लीबिया से लेकर या तो माल्टा जाएंगे या मिस्र। उसके बाद वहां से उन्हें उड़ानों के जरिए भारत लाया जाएगा। बचाव पोत 10 दिनों के भीतर लीबिया पहुंच जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications