लीबिया के खिलाफ प्रतिबंधों को भारत का समर्थन (लीड-1)

संयुक्त राष्ट्र, 27 फरवरी (आईएएनएस)। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा लीबिया के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों का तथा वहां के मौजूदा हालात को अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय भेजे जाने के निर्णय का समर्थन किया है।

परिषद ने शनिवार देर रात 15-0 के बहुमत से प्रस्ताव 1970 को अपनी मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव की मंजूरी के बाद एक व्यापक हथियार प्रतिबंध, यात्रा प्रतिबंध, और मुअम्मार गद्दाफी सरकार की सम्पत्तियों को जब्त किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब परिषद ने एकसुर से किसी मामले को अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय में भेजने को मंजूरी दी है।

लीबिया में नागरिकों की हत्या को रोकने के लिए परिषद के सदस्यों ने इन प्रतिबंधों को पूरी तरह से लागू करने की मांग की है।

लीबिया में जारी सरकारी विरोधी प्रदर्शनों के दौरान अभी तक 1,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि चूंकि भारत अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय का सदस्य नहीं है, लिहाजा उसे संयमित एवं क्रमिक दृष्टिकोण अपनाना होगा।

ज्ञात हो कि संयुक्त राष्ट्र के कुल 192 सदस्य देशों में से केवल 112 ही अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय के सदस्य हैं।

पुरी ने कहा, "हमने हालांकि यह महसूस किया कि अफ्रीका और मध्यपूर्व के हमारे सहयोगियों सहित परिषद के कई सदस्यों का मानना है कि इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भेजने सम्बंधी निर्णय, हिंसा पर तत्काल विराम लगाने और शांति एवं स्थिरता कायम करने में मददगार साबित होगा।"

पुरी ने कहा कि लीबिया के स्थायी प्रतिनिधि ने भी शनिवार को एक पत्र में इस तरह के कदम की मांग की थी। पुरी ने कहा, "इसलिए हम परिषद में बनी सहमति के साथ हैं।"

पुरी ने कहा कि लीबिया की हालात को लेकर हम चिंतित हैं, जहां लोगों की जानें जा रही हैं और बड़ी संख्या में लोग घायल हो रहे हैं।

पुरी ने कहा, "हम पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हैं, जो कि पूरी तरह अस्वीकार्य है। हम चाहते हैं कि वहां जारी हिसा जल्द से जल्द रुके और शांति व स्थिरता कायम हो।"

लीबिया में रह रहे भारतीय नागरिकों और उनकी सम्पत्तियों के प्रति चिंता जाहिर करते हुए पुरी ने अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे भारतीय के जानमाल की सुरक्षा और जो नागरिक लीबिया छोड़ना चाहते हैं, उन्हें स्वदेश वापस भेजना सुनिश्चित कराएं।

संयुक्त राष्ट्र में लीबिया के राजदूत अब्दुर्ररहीम शलगम ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि इससे लीबिया की जनता को नैतिक समर्थन मिलेगा।

उन्होंने कहा, "लीबिया सरकार की विश्वसनीयता खत्म हो गई है। यह प्रस्ताव इस फासीवादी सरकार के अंत का संकेत है। मैं लीबिया की जनता से अपील करता हूं कि वे गद्दाफी का त्याग करें और उनके अपराधों की निंदा करें।"

शलगम ने सुरक्षा परिषद से आग्रह किया कि उन लोगों पर प्रतिबंध लागू नहीं किया जाए, जिन्होंने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है या जो गद्दाफी का साथ छोड़ चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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